Kerala HC: एक 92 साल की बुजुर्ग मां को अपने ही बेटे से गुजारा भत्ता पाने के लिए कोल्लम के फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
1149 दिन की देरी से दाखिल की याचिका
बेटे ने इस याचिका का विरोध किया और मां को गवाही के लिए कोर्ट में पेश होना पड़ा। वकील ने उनसे लंबी जिरह की। इसके बाद फैमिली कोर्ट ने 29 अप्रैल 2022 को आदेश दिया कि बेटा अपनी मां को हर महीने 2,000 रुपए गुजारा भत्ता दे। बेटे ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की, लेकिन यह याचिका 1149 दिन की देरी से दाखिल की गई। अब मां की उम्र 100 साल हो चुकी है और वह अब भी बेटे से मिलने वाले भत्ते का इंतजार कर रही है।
कोर्ट ने कहा- बेटे को खुद पर शर्म आनी चाहिए
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि एक बेटा अपनी 100 साल की मां से सिर्फ 2,000 रुपए के लिए कोर्ट में लड़ रहा है। यह मां-बेटे के रिश्ते को कलंकित करने वाला मामला है।
बेटे ने कहा- मां के पास साधन हैं, भाई ने याचिका कराई
बेटे ने दावा किया कि मां के पास खुद के साधन हैं और यह याचिका उसके बड़े भाई ने करवाई है। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि मां के पास साधन हों या न हों, बेटे की जिम्मेदारी है कि वह अपनी मां का ख्याल रखे।
बेटे का तर्क- मां मेरे साथ आकर रहे तो मैं देखभाल करूंगा
बेटे ने यह भी कहा कि अगर मां उसके साथ आकर रहे तो वह देखभाल करने को तैयार है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह कोई दया नहीं, बल्कि बेटे का कर्तव्य है।
कोर्ट ने कहा- मां को कोर्ट आने की नौबत नहीं आनी चाहिए थी
कोर्ट ने कहा कि बेटे को यह स्थिति आने ही नहीं देनी चाहिए थी कि मां को कोर्ट में आकर गुजारा भत्ता मांगना पड़े। मां-बेटे का रिश्ता ऐसा होता है कि उसमें सम्मान और सेवा होनी चाहिए, न कि कानूनी लड़ाई।
बुजुर्गों के साथ धैर्य और समझ जरूरी
कोर्ट ने कहा कि जब माता-पिता बुजुर्ग हो जाते हैं, तो उनका स्वभाव और आदतें बदल जाती हैं। जैसे बचपन में मां ने बच्चों की जिद और गुस्से को सहा, वैसे ही अब बच्चों को भी अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ धैर्य रखना चाहिए।
याचिका खारिज, लेकिन जुर्माना नहीं लगाया
कोर्ट ने कहा कि यह याचिका खारिज की जाती है, लेकिन मां को नोटिस नहीं भेजा गया, इसलिए जुर्माना नहीं लगाया जा रहा। कोर्ट ने साफ कहा कि इस आदेश में हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है।

