close up photo of a wooden gavel
COUNSEL FEE: केंद्र सरकार की ओर से अदालतों में पैरवी करने वाले वकीलों के लिए खुशखबरी है।
केंद्रीय विधि मंत्रालय का 11 साल बाद फैसला
केंद्रीय विधि मंत्रालय (Union Law Ministry) ने लगभग 11 साल के लंबे अंतराल के बाद सरकारी पैनल के वकीलों की फीस में बढ़ोतरी की है। मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग द्वारा 5 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, नई दरें 1 फरवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी। नियमित अपीलों और अंतिम सुनवाई (Final Hearing) के लिए फीस ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
फीस में कितना इजाफा
वकील की श्रेणी पुरानी फीस (प्रति केस/दिन) नई फीस (प्रति केस/दिन)
ग्रुप ‘A’ वकील ₹13,500 ₹21,600
ग्रुप ‘B’ और ‘C’ वकील ₹9,000 ₹14,400
लॉ ऑफिसर्स (AG, SG और ASG) की रिटेनरशिप और अन्य कार्यों की फीस में भी संशोधन
अटॉर्नी जनरल (AG) ₹1,20,000 प्रति माह (रिटेनर फीस)।
सॉलिसिटर जनरल (SG): ₹96,000 प्रति माह (रिटेनर फीस)।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG): ₹72,000 प्रति माह (रिटेनर फीस)।
सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट में उपस्थिति: ₹38,000 प्रति केस प्रति दिन।
क्यों जरूरी थी यह बढ़ोतरी?
- महंगाई और लागत: पिछला संशोधन अक्टूबर 2015 में हुआ था। बढ़ती महंगाई और पेशेवर लागतों को देखते हुए यह वृद्धि लंबे समय से लंबित थी।
- प्रतिभाशाली वकीलों को जोड़ना: विधि आयोग की सदस्य सचिव अंजू राठी राणा के अनुसार, सरकार के पक्ष को मजबूती से रखने के लिए योग्य और प्रतिभाशाली वकीलों को पैनल में बनाए रखने के लिए बेहतर पारिश्रमिक आवश्यक है।
- – बकाया भुगतान की समस्या: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने हाल ही में वकीलों को आश्वासन दिया था कि न केवल फीस बढ़ाई जाएगी, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (जैसे कोल इंडिया) द्वारा भुगतान में होने वाली देरी को भी दूर किया जाएगा।
अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान
- मुख्यालय से बाहर सुनवाई: यदि वकील को दिल्ली या राज्य की राजधानी (मुख्यालय) से बाहर जाकर पैरवी करनी पड़ती है, तो उनके दैनिक भत्ते और यात्रा खर्च की दरों में भी वृद्धि की गई है।
- कॉन्फ्रेंस फीस: विभिन्न मंत्रालयों के साथ होने वाली कानूनी बैठकों (Conferences) की फीस को भी संशोधित किया गया है।
- बीमा योजना: सरकार जल्द ही वकीलों के लिए एक स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा योजना भी शुरू करने वाली है।







