Thursday, September 24, 2026
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Supreme Court: फिर वे कहेंगे कि मंत्र पढ़ना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा…महाकाल के वीआईपी दर्शन पर तल्खी

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में ‘वीआईपी दर्शन’ व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

यह विषय कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता: अदालत

याचिका में गर्भगृह में दर्शन और पूजा के लिए वीआईपी और सामान्य श्रद्धालुओं के बीच भेदभाव खत्म करने की मांग की गई थी। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मंगलवार को कहा कि यह विषय कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और इस पर फैसला प्रशासन को करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि वह केवल ज्यूडिशिएबिलिटी से जुड़े सवाल देखता है।

दर्पण अवस्थी की ओर से याचिका दायर

दर्पण अवस्थी की ओर से दायर याचिका पर वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि गर्भगृह में प्रवेश को लेकर एक समान नीति होनी चाहिए। उन्होंने दलील दी कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वीआईपी श्रद्धालुओं को शिवलिंग पर जल चढ़ाने की मंजूरी दी, जबकि आम भक्तों को इससे वंचित रखा। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा, “महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं होता।”

क्या सभी मौलिक अधिकार गर्भगृह के भीतर लागू होंगे?

सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए सीजेआई ने कहा कि लोग इसलिए गर्भगृह में प्रवेश की मांग करने लगते हैं क्योंकि वे देखते हैं कि कोई और ऐसा कर रहा है। उन्होंने कहा- “फिर वे कहेंगे कि मंत्र पढ़ना उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। क्या सभी मौलिक अधिकार गर्भगृह के भीतर लागू किए जाएंगे?” सीजेआई ने यह भी कहा कि ऐसी याचिकाएं दाखिल करने वाले लोग वास्तविक श्रद्धालु नहीं होते। इसके बाद पीठ ने याचिका खारिज कर दी।

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