Sunday, August 16, 2026
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Social Media SOP: 16 से कम उम्र तो बैन हो सोशल मीडिया…हाई कोर्ट की नसीहत

Social Media SOP: भारत में भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग उठने लगी है।

राज्य व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग मिलकर एक्शन प्लान तैयार करें…

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया से बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर एक कानून बनाने पर विचार करे। यह कानून ऑस्ट्रेलिया की तरह हो सकता है, जहां बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक है। न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने कहा कि बच्चों को हानिकारक ऑनलाइन कंटेंट से बचाने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट पर उम्र सीमा तय की जानी चाहिए। जब तक ऐसा कोई कानून नहीं बनता, तब तक राज्य और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग मिलकर एक एक्शन प्लान तैयार करें।

अधिकारों और इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जागरूक करें

इस प्लान के जरिए बच्चों को उनके अधिकारों और इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जागरूक किया जा सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका एस. विजयकुमार ने दायर की थी। इसमें मांग की गई है कि इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को पैरेंटल विंडो सर्विस देने का निर्देश दिया जाए और बच्चों को इंटरनेट के खतरों से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि ऑनलाइन पोर्नोग्राफिक कंटेंट (सीएसएएम) बच्चों के लिए आसानी से उपलब्ध है, जो चिंता का विषय है।

इंटरनेट पर कोई घृणित सामग्री मौजूद है तो उसे देखने या न देखने का चुनाव और अधिकार व्यक्तिगत है, लेकिन बच्चों के मामले में जोखिम बहुत अधिक है, इसलिए माता-पिता की जिम्मेदारी भी उतनी बढ़ जाती है।

  • न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश

भारत में कितने बच्चे सोशल मीडिया चलाते हैं?

  • असर-2024 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 14-16 साल के 82% बच्चे स्मार्टफोन यूजर हैं। इन्हीं में से 76% पिछले सप्ताह तक सोशल मीडिया चला रहे थे। 16 साल से कम उम्र के करीब 35 करोड़ बच्चे हैं।

क्या सोशल मीडिया बच्चों के दिमाग पर असर कर रह?

  • लोकल सर्कल्स सर्वे बताता है कि बच्चे रोजाना तीन घंटे से अधिक समय ऑनलाइन बिता रहे हैं। 9 से 17 साल के बच्चों के करीब 66 % अभिभावक मानते हैं कि सोशल मीडिया, ओटीटी और गेमिंग ने बच्चों में अधीरता, गुस्सा और सुस्ती जैसे लक्षणों को बढ़ा दिया है।

अदालत की यह है चिंता

मदुरै कोर्ट का मानना है कि आज के दौर में इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कोई ‘गेटकीपिंग’ नहीं है। एक नाबालिग बच्चा आसानी से ड्रग्स, तंबाकू या अश्लील सामग्री तक पहुंच सकता है। हाल के कुछ स्कूलों के उदाहरणों को देखें तो बच्चों में सुसाइड की भावना बढ़ गई है।

ऑस्ट्रेलिया के कानून: बच्चा ने कानून तोड़ा तो सजा सोशल मीडिया कंपनी को

  • ​ऑस्ट्रेलिया ने 10 दिसंबर को ऑनलाइन सुरक्षा संशोधन (सोशल मीडिया न्यूनतम आयु) अधिनियम 2024 लागू किया। इसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का उपयोग अवैध किया गया है।
  • इसका मकसद बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाना और उन्हें सामाजिक, भावनात्मक और डिजिटल कौशल विकसित करने के लिए समय देना।
  • यदि कोई बच्चा इसका इस्तेमाल करता पकड़ा जाता है तो सजा बच्चे या माता-पिता को नहीं, बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों (जैसे मेटा, टिकटॉक, एक्स) को मिलेगी।
  • कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ‘एज वेरिफिकेशन’ तकनीक का इस्तेमाल करें। अगर वे इसमें फेल होती हैं, तो उन पर करोड़ों डॉलर का जुर्माना लगाया जाएगा।
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