Home Delhi-NCR Reformation Home: पॉक्सो केस में अदालत की बड़ी टिप्पणी… सुधार के लिए माता-पिता का भावनात्मक साथ जरूरी

Reformation Home: पॉक्सो केस में अदालत की बड़ी टिप्पणी… सुधार के लिए माता-पिता का भावनात्मक साथ जरूरी

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Reformation Home: पॉक्सो केस में अदालत की बड़ी टिप्पणी… सुधार के लिए माता-पिता का भावनात्मक साथ जरूरी

Reformation Home: दिल्ली की एक पॉक्सो अदालत ने रविवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए चोरी के मामले में सुधार गृह (Reformation Home) में बंद एक किशोर (CCL) को रिहा करने का आदेश दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी बच्चे के सुधार के लिए माता-पिता की देखभाल और भावनात्मक सहयोग सबसे महत्वपूर्ण होता है। विशेष न्यायाधीश (POCSO) सौमित्र कुमार ने किशोर की मां द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

बीमारी और मानवीय आधार पर मिली राहत

  • अदालत ने किशोर को रिहा करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर गौर किया।
  • गंभीर बीमारी: मेडिकल रिपोर्ट से पता चला कि किशोर HIV-AIDS से पीड़ित है। अदालत ने माना कि उसे जेल या सुधार गृह के बजाय ऐसे वातावरण की जरूरत है जहां उसे सर्वोत्तम चिकित्सा देखभाल मिल सके।
  • सजा की अवधि: किशोर को 6 महीने की सुरक्षात्मक कस्टडी की सजा मिली थी, जिसमें से वह 2 महीने पहले ही पूरे कर चुका था।
  • पारिवारिक वातावरण: जज ने जोर देकर कहा, “किशोर को एक ऐसे अनुकूल माहौल में रहने की आवश्यकता है जहाँ उसे माता-पिता से आवश्यक भावनात्मक समर्थन मिल सके।”

कानूनी प्रक्रिया और संशोधन

  • किशोर को सितंबर 2025 में दोपहिया वाहन चोरी के मामले में पकड़ा गया था और दोष स्वीकार करने के बाद 3 जनवरी 2026 को उसे कस्टडी में भेजा गया था।
  • वकील की दलील: किशोर की मां के वकील रमेय कृष्ण राणा ने तर्क दिया कि कस्टडी में रखने के बजाय परिवार के साथ रहना न्याय के उद्देश्य को बेहतर ढंग से पूरा करेगा।
  • JJB के आदेश में बदलाव: कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) द्वारा दी गई 6 महीने की सजा को घटाकर उस अवधि तक सीमित कर दिया जो वह पहले ही बिता चुका है।

रिहाई की शर्तें

  • अदालत ने किशोर को पूरी तरह से मुक्त करने के बजाय कुछ शर्तें भी रखी हैं।
    -बॉन्ड: 5,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और मां के माध्यम से जमानत बॉन्ड भरना होगा।
  • मेडिकल फॉलो-अप: विशेष गृह के अधीक्षक को निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि किशोर को नियमित चिकित्सा परामर्श और दवाएं मिलती रहें।
  • काउंसलिंग: रिहाई के बाद अगले 6 महीनों तक किशोर को काउंसलिंग के लिए JJB से जुड़े मनोवैज्ञानिक के सामने पेश होना होगा।

न्यायालय की मर्मस्पर्शी टिप्पणी

“कस्टडी में रखने का उद्देश्य पूरा हो चुका है। अब उसे घर पर रहने और माता-पिता की देखभाल की जरूरत है ताकि वह समाज की मुख्यधारा में वापस लौट सके।”

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