Encroachments along Ganga: सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी के किनारों और बाढ़ क्षेत्रों (Flood Plains) में हो रहे अवैध निर्माणों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
अदालत ने केंद्र सरकार को एक व्यापक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है, जिसमें गंगा के किनारे से अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी मांगी गई है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र से ‘गंगा संरक्षण, सुरक्षा और प्रबंधन’ अधिसूचना के कार्यान्वयन की प्रगति रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने को कहा है।
अदालत के तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। रुकावटें क्या हैं? गंगा संरक्षण अधिसूचना को प्रभावी ढंग से लागू करने के रास्ते में कौन सी बाधाएं या अड़चनें आ रही हैं? सुरक्षा योजना क्या है? संबंधित राज्यों से गुजरने वाली गंगा को सुरक्षित करने और नदी के किनारों को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करने के लिए प्राधिकरण क्या कदम उठाने का इरादा रखता है? कोर्ट ने यह भी पूछा कि प्राधिकरण इस अधिसूचना को सार्थक रूप से लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से किस प्रकार के निर्देशों की अपेक्षा करता है?
डॉल्फिन और पर्यावरण का मुद्दा
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने अदालत को बताया कि नदी के किनारों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो रहा है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने इस ओर भी इशारा किया कि नदी के कुछ हिस्से मीठे पानी की डॉल्फिन (Fresh Water Dolphins) के लिए बहुत समृद्ध हैं और अतिक्रमण उनके अस्तित्व के लिए खतरा है।
मामले की पृष्ठभूमि
- याचिकाकर्ता: पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा।
- विवाद: सिन्हा ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 30 जून, 2020 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील (Eco-fragile) बाढ़ क्षेत्रों पर अवैध निर्माणों के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।
- विस्तृत जांच: सुप्रीम कोर्ट ने गंगा बेसिन के कई राज्यों को नोटिस जारी किया है और कहा है कि इस मुद्दे को केवल व्यक्तिगत मामलों तक सीमित रखने के बजाय व्यापक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।
अगला कदम
सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को करेगा। तब तक केंद्र सरकार को सभी राज्यों के साथ समन्वय कर अतिक्रमण हटाने का पूरा खाका पेश करना होगा।

