Thursday, September 24, 2026
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Income Tax Rules 2026: 1 अप्रैल से बदल जाएगा टैक्स सिस्टम, जानिए बदलाव के अहम तथ्य

Income Tax Rules 2026: भारत सरकार ने Income Tax Rules, 2026 को अधिसूचित (Notify) कर दिया है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे।

ये नए नियम इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के प्रावधानों को जमीन पर उतारेंगे और पुराने प्रोसीजरल सिस्टम की जगह लेंगे।

प्रमुख बदलाव: क्या-क्या बदलेगा?

  1. डिविडेंड (Dividend) नियमों में सख्ती: कंपनियों के लिए डिविडेंड घोषित करने के नियम अब और कड़े होंगे। कंपनियों को अनिवार्य रूप से शेयर रजिस्टर मेंटेन करना होगा। डिविडेंड का भुगतान केवल भारत के भीतर ही किया जा सकेगा, ताकि घरेलू वितरण पर नियंत्रण मजबूत रहे।
  2. स्टॉक एक्सचेंज कंप्लायंस (Transparency): पारदर्शिता बढ़ाने के लिए स्टॉक एक्सचेंजों को अब कम से कम 7 साल तक का ऑडिट ट्रेल (Audit Trail) सुरक्षित रखना होगा। ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड को डिलीट करने पर पाबंदी होगी। मॉडिफाइड ट्रांजैक्शन (बदले गए सौदों) की मंथली रिपोर्ट जमा करनी होगी।
  3. कैपिटल गेन्स (Capital Gains) में स्पष्टता: जटिल मामलों जैसे डिबेंचर कन्वर्जन (Debenture Conversion) और क्रॉस-बॉर्डर रीस्ट्रक्चरिंग (Cross-border restructuring) के लिए अब साफ गाइडलाइन्स दी गई हैं, ताकि वर्गीकरण में कोई भ्रम न रहे।
  4. जीरो कूपन बॉन्ड (Zero Coupon Bond) फ्रेमवर्क: नए नियमों के तहत बॉन्ड जारी करने से 3 महीने पहले आवेदन करना होगा। साथ ही, दो एजेंसियों से ‘इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग’ लेना और फंड के इस्तेमाल की समय-सीमा तय करना अनिवार्य होगा।

डिजिटल और क्रॉस-बॉर्डर टैक्स के नए नियम

  • Significant Economic Presence (SEP): डिजिटल और रिमोट बिजनेस के लिए टैक्स का दायरा तय कर दिया गया है। यदि किसी कंपनी का 2 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन या 3 लाख यूजर्स हैं, तो वह टैक्स के दायरे में आएगी।
  • विदेशी आय का आकलन: टैक्स अधिकारी अब नॉन-रेसिडेंट्स (Non-residents) की आय का अंदाजा ‘ग्लोबल प्रॉफिट रेशियो’ या ‘परसेंटेज बेसिस’ पर लगा सकेंगे।
  • ऑफशोर डील्स (Offshore Deals): विदेशी सौदों में भारतीय एसेट्स से जुड़ी आय की गणना के लिए एक स्टैंडर्ड फॉर्मूला तय किया गया है।

आम आदमी और एम्प्लॉइज पर असर

  • Employer Provided Accommodation: ऑफिस की तरफ से मिलने वाले घर (Accommodation) पर टैक्स छूट अब शहर की आबादी, सैलरी लेवल और घर के मालिकाना हक के आधार पर तय होगी।
  • खर्चों में छूट (Exemptions): खर्चों के लिए एक ‘सिम्प्लीफाइड और कैप्ड’ (Capped) अप्रोच अपनाई जाएगी, जिसमें इन्वेस्टमेंट वैल्यू का 1% तक सीमित रखा जा सकता है।
  • शेयर वैल्यूएशन: लिस्टेड और अनलिस्टेड शेयरों के वैल्युएशन के लिए अब एक फॉर्मूला-बेस्ड सिस्टम लागू होगा।

सरकार का लक्ष्य

इन नियमों का मुख्य उद्देश्य टैक्स विवादों को कम करना, डेटा रिपोर्टिंग को मजबूत करना और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना है। सरकार चाहती है कि क्रॉस-बॉर्डर टैक्स चोरी रुके और टैक्स सिस्टम अधिक पारदर्शी बने।

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