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Bail to advocate: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कक्षा 12 की फर्जी मार्कशीट के आधार पर उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में पंजीकरण कराने वाले एक वकील को जमानत देने से इनकार कर दिया है।
आरोपी आशीष शुक्ला की जमानत याचिका खारिज
जस्टिस कृष्ण पहल की बेंच ने आरोपी आशीष शुक्ला की जमानत याचिका खारिज करते हुए कानून के पेशे की पवित्रता पर कड़े शब्दों में टिप्पणी की। अदालत ने इस मामले को “न्याय प्रणाली के साथ गंभीर धोखाधड़ी” करार दिया है। शुक्ला के खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी) और 471 के तहत मामला दर्ज है।
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
- अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून का पालन कराने वालों का आचरण उनके शब्दों से अधिक महत्वपूर्ण होता है।
- संस्थागत धोखाधड़ी: कोर्ट ने कहा, “एक वकील अदालत का अधिकारी होता है। जब वह स्वयं ऐसी अवैधता का सहारा लेता है, तो यह न्याय की संस्था के साथ एक जानबूझकर की गई गंभीर धोखाधड़ी है।”
- सहानुभूति की कमी: बेंच ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में “गलत सहानुभूति” दिखाना कानूनी पेशे की विश्वसनीयता और पवित्रता के साथ समझौता करने के समान होगा।
- पेशा नहीं, स्तंभ: “अधिवक्ता केवल मुकदमेबाजी में शामिल पेशेवर नहीं है; वह न्याय प्रशासन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।”
क्या है पूरा मामला?
- आरोप: कानपुर के अधिवक्ता आशीष शुक्ला पर आरोप है कि उन्होंने 1994 की इंटरमीडिएट (कक्षा 12) की परीक्षा में फेल होने के बावजूद फर्जी मार्कशीट बनवाकर खुद को पास दिखाया और उसी के आधार पर वकील के रूप में पंजीकरण कराया।
- जांच में खुलासा: यूपी बोर्ड के आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्टि हुई कि शुक्ला परीक्षा में फेल थे। आरोपी ने जांच अधिकारी को सर्टिफिकेट देने के बजाय दावा किया कि प्रमाण पत्र खो गए हैं।
- विचित्र दलील: आरोपी ने कोर्ट में यह तर्क भी दिया कि “दीमक” ने चुनिंदा रूप से केवल कक्षा 12 का प्रमाण पत्र नष्ट कर दिया था, जिसे कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।
- गिरफ्तारी: आरोपी की अग्रिम जमानत नवंबर 2024 में रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद दिसंबर में उन्हें नैनीताल से गिरफ्तार किया गया था।






