side view of a police car parked by the roadside at night
Functional CCTV cameras: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश के पुलिस स्टेशनों में लंबे समय से खराब पड़े CCTV कैमरों और फुटेज संरक्षित न किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई है।
संतोषजनक कार्रवाई और स्पष्ट सर्कुलर जारी करें
जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबिता रानी की बेंच ने चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक कार्रवाई और स्पष्ट सर्कुलर जारी नहीं किया गया, तो मुख्य सचिव को 23 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि: पुलिस पर बर्बरता का आरोप
- यह आदेश श्याम सुंदर अग्रहरी नामक एक 56 वर्षीय दिव्यांग व्यक्ति की याचिका पर आया है।
- आरोप: याचिकाकर्ता का दावा है कि सुल्तानपुर की मोतिगरपुर पुलिस ने उसे 6 सितंबर 2024 की रात घर से उठाया और लॉकअप में बेरहमी से पीटने के बाद एक झूठे मुकदमे में फंसा दिया।
- CCTV की मांग: जब याचिकाकर्ता ने सच्चाई साबित करने के लिए पुलिस स्टेशन के CCTV फुटेज की मांग की, तो सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) ने हलफनामा दिया कि वहां के कैमरे 1 जून 2025 से खराब पड़े हैं।
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा: “यह महज संयोग नहीं”
- बार-बार की घटना: “अजीब बात है कि जब भी कोर्ट किसी पुलिस स्टेशन से फुटेज मांगता है, तो पता चलता है कि कैमरे खराब हैं। यह बार-बार होना महज संयोग नहीं हो सकता।”
- सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना: सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि फुटेज को डेढ़ साल (18 महीने) और कम से कम 6 महीने तक संरक्षित रखा जाए।
- DGP पर सवाल: कोर्ट ने पाया कि यूपी के डीजीपी (DGP) ने 20 जून 2025 को एक सर्कुलर जारी किया था जिसमें फुटेज को केवल ढाई महीने तक रखने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना (Contemptuous) करार दिया।
हाई कोर्ट के मुख्य निर्देश
- मुख्य सचिव को निर्देश: एक विस्तृत जांच करें और जिला पुलिस प्रमुखों (SP/SSP) की जिम्मेदारी तय करते हुए एक सर्कुलर जारी करें कि यदि फुटेज संरक्षित नहीं पाया गया तो उन पर कार्रवाई होगी।
- DGP के सर्कुलर में सुधार: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य के नियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समयसीमा के अनुरूप होने चाहिए।






