Home Scam Nose Justice Yashwant Varma row: एक बार फिर जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग पर बढ़ी हलचल…मानसून सत्र में रिपोर्ट सौंपेगी जांच समिति

Justice Yashwant Varma row: एक बार फिर जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग पर बढ़ी हलचल…मानसून सत्र में रिपोर्ट सौंपेगी जांच समिति

0
Justice Yashwant Varma row: एक बार फिर जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग पर बढ़ी हलचल…मानसून सत्र में रिपोर्ट सौंपेगी जांच समिति
In-House Committee Inspect Judge's Residence, New Delhi.....File Pic

Justice Yashwant Varma row: इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति अपनी रिपोर्ट मानसून सत्र में सौंप सकती है।

यह मामला जस्टिस वर्मा के आवास से जली हुई करेंसी नोटों की बरामदगी से जुड़ा है। 12 अगस्त, 2025 को अध्यक्ष ने उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए इस समिति का गठन किया था, जिसके साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज के महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया शुरू हो गई थी।

समिति का पुनर्गठन

25 फरवरी को इस समिति का पुनर्गठन किया गया। वर्तमान में समिति के सदस्य में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार, बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (इन्हें मद्रास HC के मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव की जगह शामिल किया गया है) जस्टिस श्री चंद्रशेखर, कर्नाटक हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी. वी. आचार्य हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समिति अगले सत्र (मानसून सत्र) में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है।

मामले की पृष्ठभूमि: जली हुई नोटों की बरामदगी

  • घटना: 14 मार्च, 2025 को नई दिल्ली में जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास पर जली हुई करेंसी नोटों की गड्डियां मिली थीं।
  • स्थानांतरण: इस घटना के बाद उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया था।
  • संसदीय प्रस्ताव: 21 जुलाई, 2025 को भाजपा सदस्य रविशंकर प्रसाद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत 146 सांसदों ने जस्टिस वर्मा को हटाने का प्रस्ताव अध्यक्ष को सौंपा था।

CJI और इन-हाउस जांच का रुख

  • तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने पहले ही इस मामले में ‘इन-हाउस’ जांच कराई थी।
  • इस्तीफे से इनकार: जांच रिपोर्ट के आधार पर CJI ने जस्टिस वर्मा को इस्तीफा देने या महाभियोग का सामना करने को कहा था।
  • राष्ट्रपति को सिफारिश: जस्टिस वर्मा द्वारा इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद, CJI खन्ना ने रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दी थी।
  • सुप्रीम कोर्ट का रुख: शीर्ष अदालत ने भी जस्टिस वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने CJI की सिफारिश को चुनौती दी थी।

ओम बिरला का बयान: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वित्तीय और बौद्धिक ईमानदारी न्यायपालिका में आम आदमी के विश्वास की नींव है। उन्होंने जोर दिया कि तथ्य भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं जो संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत कार्रवाई के योग्य हैं। संसद को इस मुद्दे पर एक स्वर में बोलना चाहिए और भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश देना चाहिए।

क्या है न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968?

इसी कानून की धारा 3(2) के तहत इस तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। यदि समिति आरोपों को सही पाती है, तो संसद के दोनों सदनों में महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here