MC Mehta case: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा अध्याय 12 मार्च को औपचारिक रूप से संपन्न हो गया।
सुप्रीम कोर्ट ने 1985 में पर्यावरणविद् एम.सी. मेहता द्वारा दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को लेकर दायर की गई ऐतिहासिक जनहित याचिका (PIL) का निपटारा कर दिया है। हालांकि, यह प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई का अंत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत है। अदालत ने अब इस मुद्दे पर ‘स्वत: संज्ञान’ (Suo Motu) के तहत नई कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है।
कौन हैं 79 वर्षीय एम.सी. मेहता?
- महेश चंद्र मेहता (Mahesh Chander Mehta) केवल एक वकील नहीं, बल्कि भारत में ‘पर्यावरण कानून’ के जनक माने जाते हैं।
- जन्म और शिक्षा: 12 अक्टूबर 1946 को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के एक छोटे से गांव धांगरी में जन्मे मेहता ने जम्मू विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली।
- सफर: 1983 में दिल्ली आने के बाद 1984 से उन्होंने अपना पूरा ध्यान पर्यावरण से जुड़े मुकदमों पर केंद्रित कर दिया।
- प्रमुख उपलब्धियां: उन्होंने गंगा प्रदूषण, ताज महल का संरक्षण (ताज ट्रेपेज़ियम केस) और दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए अभूतपूर्व कानूनी संघर्ष किया।
प्रमुख पुरस्कार
- गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार (इसे अमेरिका/यूरोप में ‘वैकल्पिक नोबेल’ माना जाता है)।
- मैग्सेसे पुरस्कार (1997)।
- संयुक्त राष्ट्र का ग्लोबल 500 पुरस्कार (1993)।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: अब क्या बदलेगा?
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस पुरानी याचिका को बंद करना प्रशासनिक रूप से जरूरी था।
नए बदलाव
- नया शीर्षक: अब इस मामले को “Re: Issues of air pollution in National Capital Region” के नाम से जाना जाएगा।
- बेहतर प्रबंधन: पुरानी याचिका में हजारों विविध आवेदन (Applications) जमा हो गए थे। अब रजिस्ट्री हर लंबित आवेदन को एक स्वतंत्र ‘रिट याचिका’ के रूप में दर्ज करेगी।
- ध्यान केंद्रित सुनवाई: इससे प्रदूषण के विभिन्न पहलुओं (जैसे पराली, वाहन उत्सर्जन, निर्माण धूल) पर अलग-अलग और अधिक प्रभावी ढंग से सुनवाई हो सकेगी।
एम.सी. मेहता केस की विरासत
पिछले 40 वर्षों में इस एक याचिका ने दिल्ली का चेहरा बदल दिया। सार्वजनिक परिवहन का CNG में परिवर्तन। प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को शहर से बाहर करना। लेड-फ्री पेट्रोल की शुरुआत। दिल्ली के चारों ओर ‘ग्रीन बेल्ट’ का संरक्षण।
अदालत का संदेश
कोर्ट ने मेहता के योगदान को सम्मान देते हुए माना कि यह याचिका अब अपने मूल उद्देश्य को पार कर एक संस्थागत रूप ले चुकी है। अब न्यायपालिका खुद इसकी कमान संभालेगी ताकि दिल्ली-NCR के नागरिकों को स्वच्छ हवा का मौलिक अधिकार मिल सके।

