
NIA COURTS: नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) द्वारा जांचे जा रहे आतंकवाद के मामलों के निपटारे में तेजी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की योजना
अदालत ने दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र सहित 17 राज्यों को नोटिस जारी कर विशेष NIA अदालतों के गठन पर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की उस योजना के बाद हुई है, जिसमें उन राज्यों में विशेष अदालतें बनाने का प्रस्ताव है जहां 10 या उससे अधिक केस लंबित हैं। MHA की रिपोर्ट के अनुसार, 17 राज्यों में लंबित मामलों की संख्या चिंताजनक है।
केंद्र सरकार का वित्तीय प्रस्ताव
- अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बेंच को बताया कि गृह मंत्रालय ने इन विशेष अदालतों के लिए वित्तीय सहायता के मानक तय कर लिए हैं।
- एकमुश्त अनुदान: प्रत्येक विशेष अदालत के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के लिए केंद्र ₹1 करोड़ का वन-टाइम ग्रांट देगा।
- सालाना खर्च: कर्मचारियों के वेतन, IT उपकरण और वाहनों जैसे आवर्ती खर्चों (Recurring Expenditure) के लिए हर साल ₹1 करोड़ दिए जाएंगे।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा केस लंबित हैं?
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश लंबित मामलों की संख्या
दिल्ली 59 (सर्वाधिक)
जम्मू और कश्मीर 38
असम 33
गुजरात 33
केरल 33
प्रमुख अदालतों की वर्तमान स्थिति
- दिल्ली: राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में NIA, UAPA और NDPS जैसे कानूनों के लिए 16 विशेष अदालतें स्थापित की जा रही हैं, जो अप्रैल 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है।
- महाराष्ट्र: मुंबई के सिटी सिविल कोर्ट में मार्च 2025 से एक विशेष NIA कोर्ट पहले से ही कार्यरत है।
- बिहार: पटना में 8 जनवरी की अधिसूचना के माध्यम से एक विशेष NIA कोर्ट नामित किया गया है।
- अन्य: जम्मू और रांची में भी विशेष NIA अदालतें नामित की जा चुकी हैं।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा:”ट्रायल में देरी अन्याय का कारण बनती है, खासकर तब जब एक आरोपी को लंबी कैद और मुकदमे के बाद अंततः बरी कर दिया जाता है। त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए इन अदालतों का गठन अनिवार्य है।”सुप्रीम कोर्ट ने सभी 17 राज्यों के मुख्य सचिवों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।






