Monday, August 24, 2026
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Court News: ‘बाउंसर’ शब्द डर व आतंक फैलाने के लिए प्रयोग हो रहा है…क्यूं कहा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने

Court News: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने निजी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अपने कर्मचारियों को ‘बाउंसर’ कहने पर गंभीर चिंता जताई है।

एजेंसी के नाम में ‘बाउंसर’ शब्द का इस्तेमाल किया गया

जस्टिस अनुप चितकारा की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की एजेंसी के नाम में ‘बाउंसर’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जो बेहद चिंताजनक है। कोर्ट ने कहा कि यह शब्द आम लोगों के मन में डर, चिंता और आतंक पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जो किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। यह टिप्पणी कोर्ट ने एक निजी सुरक्षा एजेंसी चलाने वाले व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

राज्य सरकार ठोस कदम नहीं उठा रही

कोर्ट ने कहा कि आजकल कुछ सुरक्षा एजेंसियां और उनके कर्मचारी ‘बाउंसर’ शब्द की आड़ में डर और धमकी का माहौल बना रहे हैं। वे खुद को कानून से ऊपर समझते हैं और आम लोगों को अपमानित करने से नहीं हिचकते। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को इस प्रवृत्ति की जानकारी है, लेकिन वह इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। यह रवैया असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

बाउंसर शब्द का मतलब और गलत इस्तेमाल

कोर्ट ने मेरियम-वेबस्टर, ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज डिक्शनरी का हवाला देते हुए बताया कि ‘बाउंसर’ का मतलब होता है- ऐसा व्यक्ति जो बार या क्लब जैसे सार्वजनिक स्थानों से अनुशासनहीन लोगों को बाहर निकालता है। लेकिन अब इस शब्द का इस्तेमाल डर फैलाने और लोगों को धमकाने के लिए किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसीज़ (रेगुलेशन) एक्ट, 2005 और पंजाब प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी रूल्स, 2007 में कहीं भी ‘बाउंसर’ शब्द का जिक्र नहीं है। इन कानूनों में केवल ‘सिक्योरिटी गार्ड’ शब्द का प्रयोग किया गया है।

सुरक्षा गार्ड का असली काम क्या है

कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा गार्ड का असली काम होता है- सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित करना। होटल और बार में उनका काम होता है- अनुशासनहीन लोगों को शालीनता से रोकना और जरूरत पड़ने पर उन्हें सम्मानपूर्वक बाहर निकालना। सुरक्षा गार्ड आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने, निगरानी रखने और किसी भी खतरे या आपराधिक गतिविधि की सूचना पुलिस को देने के लिए प्रशिक्षित होते हैं। लेकिन जब यही गार्ड या उनके मालिक खुद को कानून से ऊपर समझने लगते हैं और धमकी, हिंसा और जबरदस्ती का सहारा लेते हैं, तो यह समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।

राज्य की चुप्पी और कोर्ट की चेतावनी

कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार और कार्यपालिका ‘बाउंसर’ शब्द के गलत इस्तेमाल को लेकर चुप हैं। यह समझ से परे है कि किसी कर्मचारी वर्ग की पहचान को इस तरह सीमित और डरावना कैसे बनाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उसका उद्देश्य कार्यपालिका को इस मुद्दे के प्रति संवेदनशील बनाना है। अब यह राज्य सरकार पर है कि वह यह सुनिश्चित करे कि कोई भी रिकवरी एजेंट या सुरक्षा एजेंसी अपने कर्मचारियों को ‘बाउंसर’ न कहे, ताकि वे अपने काम को सम्मान, गरिमा और जिम्मेदारी के साथ जोड़ सकें।

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