Delhi High Court
Railway Claims: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक यात्री की ट्रेन से गिरकर मौत होने के मामले में रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल को उसके परिजनों को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
खुर्जा स्टेशन पर पानी लेने उतरा था यात्री
कोर्ट ने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि मृतक ने ट्रेन में गलत साइड से चढ़ाई की थी, क्योंकि यह साबित हो चुका है कि वह ट्रेन में चढ़ चुका था और उसके बाद गिरा। यह मामला रहनुमा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार मृतक नई दिल्ली से सिवान जंक्शन जाने के लिए आम्रपाली एक्सप्रेस में सवार हुआ था। खुर्जा जंक्शन पर पानी लेने के लिए वह ट्रेन से उतरा, क्योंकि कोच में पानी की सुविधा नहीं थी। इसके बाद वह दोबारा उसी ट्रेन में चढ़ा, लेकिन भीड़ के कारण धक्का-मुक्की में चलती ट्रेन से गिर गया और उसकी मौत हो गई।
रेलवे ने जिम्मेदारी से इनकार किया
रेलवे ने दावा किया कि मृतक खुरजा में रेलवे ट्रैक पार कर रहा था और दूसरी ट्रेन की चपेट में आ गया। ट्रिब्यूनल ने रेलवे के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि मृतक की गलती थी, क्योंकि उसे प्लेटफॉर्म की तरफ से उतरना चाहिए था, न कि ट्रैक की तरफ से।
गवाहों की गवाही से कोर्ट ने बदला फैसला
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने रेलवे के दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि मृतक ने भले ही गलत साइड से चढ़ाई की, लेकिन वह ट्रेन में चढ़ चुका था और भीड़ के कारण गिरा। कोर्ट ने ट्रेन में साथ यात्रा कर रहे नसीम नामक व्यक्ति की गवाही को अहम माना, जिसने कहा कि मृतक किसी दूसरी ट्रेन से नहीं टकराया था। साथ ही, उस ट्रेन के लोको पायलट की गवाही भी देखी गई, जिससे कथित तौर पर मृतक टकराया था। कोर्ट ने पाया कि मृतक उसी ट्रेन से गिरा जिसमें वह पहले से यात्रा कर रहा था।
यह रहा कोर्ट का निष्कर्ष
कोर्ट ने कहा, “यह एक अप्रत्याशित हादसा था, जो तब हुआ जब मृतक ने अमरपाली एक्सप्रेस में दोबारा चढ़ाई की। भले ही वह गलत साइड से चढ़ा हो, लेकिन यह ज्यादा मायने नहीं रखता, क्योंकि वह ट्रेन में चढ़ चुका था।”
मुआवजा देने का आदेश
कोर्ट ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि रेलवे एक्सीडेंट्स एंड अनटुवर्ड इंसिडेंट्स (कंपनसेशन) रूल्स 1990 के तहत तय मुआवजा आठ हफ्तों के भीतर पीड़ित के परिजनों को दिया जाए।





