Delhi High Court
Animal Cruelty: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक प्राइवेट लैब को पशुओं पर परीक्षण करने से रोक दिया है।
तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं: कोर्ट
यह फैसला जानवरों के साथ क्रूरता के आरोपों के बाद लिया गया। कोर्ट ने 8 जुलाई को पालतूर बायोसाइंसेज प्राइवेट लिमिटेड की जांच रिपोर्ट और तस्वीरों को देखने के बाद कहा कि जानवरों की स्थिति सुधारने के लिए तुरंत अंतरिम निर्देश जरूरी हैं। कोर्ट ने पशु प्रयोगों की निगरानी करने वाली संस्था सीसीएसईए और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय को निर्देश दिया कि जानवरों के इलाज और देखभाल के लिए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। हाईकोर्ट ने सीसीएसईए और पालतूर बायोसाइंसेज को नोटिस जारी कर तीन हफ्तों में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
जानवरों को बिना बेहोश किए इलाज जैसी प्रथा को रोकें
कोर्ट ने यह भी कहा कि जानवरों को बिना बेहोश किए इलाज करना और अनावश्यक रूप से मार देना जैसी प्रथाओं को रोका जाए। साथ ही, जानवरों के लिए उचित आवास की व्यवस्था की जाए। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए सीसीएसईए और याचिकाकर्ता के प्रतिनिधियों की संयुक्त टीम एक सप्ताह के भीतर निरीक्षण करे और दो हफ्तों में जरूरी कदम उठाए जाएं। चार हफ्तों में स्थिति रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। सीसीएसईए के वकील ने कोर्ट को बताया कि 17 जून की रिपोर्ट में याचिकाकर्ता की आशंकाएं सही पाई गईं। इसके बाद संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और आगे की जांच की जा रही है।
याचिकाकर्ताओं का दावा
पेटा इंडिया ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पालतूर बायोसाइंसेज एक प्रीक्लिनिकल कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च ऑर्गनाइजेशन और कमर्शियल बीगल डॉग ब्रीडर है, जो जानवरों पर परीक्षण और प्रजनन का काम करता है। पेटा ने सीसीएसईए को शिकायत दी थी कि इस संस्था में जानवरों के साथ अमानवीय व्यवहार और लापरवाही हो रही है। पेटा ने बताया कि सीसीएसईए द्वारा गठित एक मल्टीडिस्पिलनरी कमेटी ने इस संस्था का निरीक्षण किया और 17 जून को रिपोर्ट दी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि संस्था अब भी जानवरों को मारने जैसी आपत्तिजनक गतिविधियों में शामिल है और उन्हें न तो उचित आवास मिल रहा है और न ही पशु चिकित्सा सेवाएं।







