Patna High Court
Patna HC: पटना हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने केस को काउंसलिंग के लिए काउंसलर्स के पास नहीं भेजा, जो फैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 के तहत जरूरी है।
फैमिली कोर्ट्स में काउंसलर्स काे नियुक्ति करें
फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी को भरण-पोषण देने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक चौधरी की सिंगल बेंच ने कहा कि न तो काउंसलर की नियुक्ति का कोई जिक्र है और न ही काउंसलिंग की प्रक्रिया अपनाई गई। कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे राज्य भर के फैमिली कोर्ट्स में काउंसलर्स की नियुक्ति और उनके कामकाज की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें।
याचिकाकर्ता पति ने फैसले पर आपत्ति जताया
याचिकाकर्ता पति ने फैमिली कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि 1984 का एक्ट विवाद सुलझाने के लिए है, न कि परिवार तोड़ने के लिए। उन्होंने कहा कि पटना हाईकोर्ट फैमिली कोर्ट रूल्स, 2000 के नियम 10 और 11 तथा बिहार फैमिली कोर्ट रूल्स, 2011 के नियम 9 और 10 के तहत काउंसलिंग की प्रक्रिया तय है, जिसे नजरअंदाज किया गया।
काउंसलिंग के बिना फैसला देना कानून का उल्लंघन
कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट्स एक्ट की धारा 9 और संबंधित नियमों का पालन अनिवार्य है। अगर सरकार द्वारा काउंसलर्स की नियुक्ति नहीं की गई है और केसों को उनके पास नहीं भेजा जा रहा है, तो यह कानून का उल्लंघन है। कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रतिद्वंद्वी प्रणाली (adversarial system) की तरह नहीं चलाया जा सकता।
रजिस्ट्रार जनरल से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे राज्य के सभी फैमिली कोर्ट्स में काउंसलर्स की नियुक्ति, उनके वेतन और रोजाना निपटाए जा रहे केसों की संख्या की जानकारी वाली रिपोर्ट कोर्ट को दें। कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अंतरिम भरण-पोषण की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि वह केस के अंतिम फैसले तक जीविकोपार्जन कर सके।
अंतिम फैसला रिपोर्ट मिलने के बाद
कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस क्रिमिनल रिवीजन पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा। अभी सिर्फ अंतरिम राहत दी जा रही है।





