Doctor’s Care: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर न्यायपालिका डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों का साथ नहीं देगी, तो समाज हमें माफ नहीं करेगा।
बीमा कंपनियां वैध दावे निपटाएं
अदालत ने यह टिप्पणी उन डॉक्टरों और हेल्थ वर्कर्स को बीमा लाभ से बाहर रखने के खिलाफ सुनवाई के दौरान की, जिन्होंने निजी क्लीनिकों, डिस्पेंसरी और गैर-मान्यता प्राप्त अस्पतालों में कोविड ड्यूटी करते हुए अपनी जान गंवाई थी। न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बीमा कंपनियां वैध दावे निपटाएं, और यह धारणा गलत है कि निजी डॉक्टर केवल लाभ कमाने के लिए काम करते थे।
समान योजनाओं की जानकारी और आंकड़े पेश करने के निर्देश
अदालत ने कहा, अगर हम अपने डॉक्टरों का ख्याल नहीं रखेंगे, समाज हमें कभी माफ नहीं करेगा। अगर कोई डॉक्टर कोविड ड्यूटी पर था और उसकी मृत्यु कोविड से हुई, तो सिर्फ इसलिए कि वह सरकारी सेवा में नहीं था, उसका दावा खारिज नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रधानमंत्री गरीब कल्याण बीमा योजना (PMGKP) के अलावा उपलब्ध अन्य समान योजनाओं की जानकारी और आंकड़े पेश करे। कोर्ट ने कहा, “आप डेटा दें, हम सिद्धांत तय करेंगे, और उसी आधार पर बीमा कंपनियों को दावे तय करने होंगे।”
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील
यह याचिका प्रदीप अरोड़ा और अन्य की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट के 9 मार्च 2021 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि निजी अस्पतालों के डॉक्टरों और स्टाफ को बीमा लाभ नहीं मिलेगा, जब तक कि उनकी सेवाएं राज्य या केंद्र सरकार ने औपचारिक रूप से नहीं ली हों। यह मामला किरण भास्कर सुर्गडे से जुड़ा है, जिनके पति — ठाणे में निजी क्लिनिक चलाने वाले डॉक्टर — की कोविड-19 से 2020 में मृत्यु हुई थी। बीमा कंपनी ने उनका दावा इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि उनका क्लिनिक कोविड अस्पताल के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं था। PMGKP योजना मार्च 2020 में शुरू की गई थी ताकि कोविड योद्धाओं के परिवारों को सुरक्षा दी जा सके। योजना के तहत ₹50 लाख का बीमा कवर दिया जाता है।

