Supreme Court View
MBBS education validation: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश में एक मेडिकल छात्र को अपनी MBBS डिग्री पूरी करने की अनुमति दी है।
बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका
इस मामले में अदालत ने उसका अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाणपत्र अमान्य घोषित कर दिया गया हो। कोर्ट ने साफ कहा कि छात्र की डिग्री तो सुरक्षित रहेगी, लेकिन अब वह भविष्य में ST कैटेगरी का कोई लाभ नहीं ले सकेगा। यह आदेश CJI बीआर गवई और जस्टिस विजय विश्नोई की बेंच ने दिया। मामला बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ था, जिसमें Scrutiny Committee द्वारा छात्र का ‘मणेरवरलू’ जाति का ST प्रमाणपत्र अमान्य कर जब्त करने का आदेश बरकरार रखा गया था।
पीछे की कहानी: ST सीट पर MBBS में दाखिला, जांच लंबी चलती रही
याचिकाकर्ता ने मेडिकल कॉलेज में ST आरक्षित सीट पर MBBS में एडमिशन लिया था। इसी दौरान उसकी जनजाति स्थिति की जांच Scrutiny Committee में पेंडिंग रही। जांच पूरी होने से पहले ही छात्र पूरी MBBS पढ़ाई कर चुका था। बाद में समिति ने उसकी ST दावे को खारिज कर प्रमाणपत्र अमान्य कर दिया।
जनरल कैटेगरी की पूरी फीस चुका चुका था छात्र
सिनियर एडवोकेट सुधांशु एस. चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि छात्र ने अपने कोर्स की जनरल कैटेगरी वाली पूरी फीस जमा की थी। इसलिए एडमिशन पूरा होने के बाद सीट को किसी और को नहीं दिया जा सकता था।
‘कीमती मेडिकल शिक्षा व्यर्थ हो जाएगी’ — सुप्रीम कोर्ट
बेंच ने कहा कि छात्र ने 5 साल की मेडिकल शिक्षा पूरी कर ली है, ऐसे में “अगर उसे सुरक्षा न दी गई तो उसकी कीमती मेडिकल शिक्षा बेकार चली जाएगी।”इस आधार पर कोर्ट ने उसकी MBBS डिग्री को संरक्षण देने का आदेश दिया।
कोर्ट का अंतिम आदेश
कोर्ट ने कहा: “हम याची द्वारा की गई शिक्षा की रक्षा करने के इच्छुक हैं। अतः MBBS डिग्री के लिए की गई उसकी पढ़ाई सुरक्षित रहेगी। लेकिन वह आगे ST श्रेणी का कोई लाभ नहीं ले सकेगा।”
S U P R E M E C O U R T O F I N D I A
Petition(s) for Special Leave to Appeal (C) No(s). 26461/2024 [Arising out of impugned final judgment and order dated 20-08-2024 in WP No. 7839/2020 passed by the High Court of Judicature at Bombay at Aurangabad]
VEDKUMAR VERSUS THE STATE OF MAHARASHTRA & ORS.







