Sunday, September 20, 2026
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UP-HC: DNA TEST पर सख्त हाई कोर्ट…“हर विवाद में नहीं हो सकता DNA टेस्ट”

UP-HC: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, सिर्फ इसलिए कि कोई पक्ष अदालत में पैरेंटेज (पितृत्व) पर शक जाहिर कर दे, DNA टेस्ट का आदेश रूटीन तरीके से नहीं दिया जा सकता।

रामराज पटेल की याचिका खारिज

कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे टेस्ट तभी कराए जा सकते हैं जब यह साबित हो कि संबंधित अवधि में दंपती के बीच सहवास (cohabitation) का कोई मौका ही नहीं था।जस्टिस चावन प्रकाश ने यह टिप्पणी रामराज पटेल की याचिका खारिज करते हुए की। पटेल ने दावा किया था कि दिसंबर 2012 में जन्मी बच्ची उसकी जैविक संतान नहीं है, क्योंकि उसकी पत्नी मई 2011 से अपने मायके में रह रही थी। निचली अदालत और सेशन कोर्ट पहले ही DNA टेस्ट की मांग ठुकरा चुके थे। हाई कोर्ट ने भी कहा, “DNA टेस्ट आदेश कोई रूटीन प्रक्रिया नहीं है। यह तभी संभव है जब हालात बिल्कुल स्पष्ट हों।”

स्पेशल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के निर्देश को दी थी चुनौती

पटेल ने स्पेशल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वारा DNA टेस्ट से इनकार किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। ASJ वाराणसी ने भी उसकी अपील खारिज कर दी थी। पटेल का कहना था कि उसकी शादी अप्रैल 2008 में हुई थी और पत्नी सिर्फ एक हफ्ते ही ससुराल में रही। वह इंटर कॉलेज में टीचर है और पढ़ी-लिखी होने के कारण एक “अनपढ़ ग्रामीण” के साथ रहना नहीं चाहती थी। हाई कोर्ट ने कहा, “DNA टेस्ट का आदेश तभी दिया जा सकता है जब यह साबित हो कि संबंधित अवधि में पति-पत्नी के बीच सहवास की कोई संभावना नहीं थी।”कोर्ट ने कहा कि सिर्फ संदेह के आधार पर किसी भी महिला या बच्चे की गरिमा को प्रभावित करने वाला ऐसा आदेश जारी नहीं किया जा सकता।

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