Mumbai Air Pollution....File Image
BMC Air Pollution: मुंबई में बिगड़ती हवा और बढ़ते प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को कड़ी फटकार लगाई।
पीठ ने नाराजगी जताई
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखद की पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि BMC प्रदूषण के मुद्दे पर “आंखें मूंदकर” बैठी है और समस्या को कम करने के लिए कुछ नहीं कर रही है। मामले की अगली सुनवाई अब 20 जनवरी को होगी।
अंधाधुंध निर्माण पर तीखे सवाल
हाईकोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि मुंबई जैसे छोटे शहर में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 125 निर्माण प्रोजेक्ट्स को मंजूरी कैसे दे दी गई? कोर्ट ने कहा, “यह संख्या बहुत अधिक है। अब स्थिति आपके नियंत्रण से बाहर हो चुकी है और आप चीजों को संभाल नहीं पा रहे हैं।” अदालत ने चेतावनी दी कि यदि प्रदूषण कम नहीं हुआ, तो भविष्य में निर्माण कार्यों की अनुमति पर रोक लगा दी जाएगी।
चुनावी ड्यूटी का बहाना नहीं चलेगा
जब BMC के वकील ने दलील दी कि प्रदूषण निगरानी दस्ते के अधिकारी चुनाव ड्यूटी में व्यस्त हैं, तो बेंच ने दोटूक कहा— “चुनाव ड्यूटी कोई बहाना नहीं हो सकता। आप चुनाव आयोग से छूट मांग सकते थे।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निगम के पास व्यापक शक्तियां हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन शून्य है।
सुनवाई की मुख्य बातें:
- प्रिवेंटिव एक्शन: कोर्ट ने कहा कि उपाय ‘निवारक’ (Preventive) होने चाहिए, न कि समस्या बढ़ने के बाद के उपचार (Remedial)।
- तकनीक का इस्तेमाल: निगरानी दस्तों को बटन कैमरा और GPS डिवाइस से लैस करने के निर्देश दिए गए।
- कमिश्नर की पेशी: BMC कमिश्नर भूषण गगरानी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अब हर दस्ता रोजाना कम से कम दो निर्माण साइट्स का निरीक्षण करेगा।





