Delhi High Court
Legal guardian of husband: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला की याचिका पर बड़ा फैसला सुनाते हुए उसे अपने बीमार पति का ‘लीगल गार्जियन’ (कानूनी अभिभावक) नियुक्त किया है।
महिला के पति ब्रेन हेमरेज के बाद काेमा मेें हैं
जस्टिस सचिन दत्ता ने प्रोफेसर अलका आचार्य की याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें अपने पति सलाम खान की संपत्ति, बैंक खातों और उनके इलाज से जुड़े तमाम फैसले लेने का कानूनी अधिकार दे दिया है। महिला के पति ब्रेन हेमरेज के बाद ‘वेजिटेटिव स्टेट’ (अचेत अवस्था) और कोमा में हैं।
‘वेजिटेटिव स्टेट’ में हैं पति, सालभर से बिस्तर पर
याचिका में बताया गया कि प्रोफेसर अलका के पति सलाम खान को 2 फरवरी 2025 को गंभीर ब्रेन हेमरेज हुआ था। अपोलो और फोर्टिस अस्पताल में चले लंबे इलाज और सर्जरी के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। वे 11 अप्रैल 2025 से पूरी तरह बिस्तर पर हैं और सांस लेने के लिए ट्रैकियोस्टोमी ट्यूब व खाने के लिए राइल ट्यूब के सहारे हैं। डॉक्टरों ने प्रमाणित किया है कि वे पूरी तरह अचेत हैं।
कोर्ट ने पत्नी को दिए ये अधिकार
- 31 दिसंबर 2025 को दिए अपने आदेश में हाईकोर्ट ने प्रोफेसर अलका को निम्नलिखित शक्तियां दी हैं।
- इलाज का फैसला: पति के मेडिकल ट्रीटमेंट और देखभाल से जुड़े निर्णय।
- वित्तीय अधिकार: बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), म्यूचुअल फंड और कार को ऑपरेट करना।
- संपत्ति का प्रबंधन: पति के नाम वाली या जॉइंट अचल संपत्ति (फ्लैट आदि) को उनके इलाज और खर्चों के लिए मैनेज करना या बेचना।
- रोजमर्रा के खर्च: घर और पति की जरूरतों के लिए फंड का इस्तेमाल करना।
क्यों पड़ी कानूनी अभिभावक की जरूरत?
सलाम खान के अचेत होने के कारण उनकी संपत्तियों और बैंक खातों से लेन-देन रुका हुआ था। उनके महंगे इलाज और घर के खर्चों को सुचारू रूप से चलाने के लिए संपत्ति का प्रबंधन जरूरी था। कानूनन, ऐसी स्थिति में बैंक या रजिस्ट्रार बिना कोर्ट के आदेश के किसी दूसरे व्यक्ति को अधिकार नहीं देते। कोर्ट ने एसडीएम (SDM) की रिपोर्ट और मेडिकल जांच के बाद यह आदेश जारी किया।







