close up on hands of man and woman during a traditional wedding ceremony
False promise of marriage: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शादी के कथित झूठे वादे पर शारीरिक संबंध बनाने के एक मामले में दर्ज FIR को रद्द कर दिया है।
यह रही अदालत की टिप्पणी
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि यह कानून “छल या धोखे” (Deceit) को दंडित करने के लिए है, न कि “निराशा” (Disappointment) को। अदालत ने स्पष्ट किया कि धारा 69 के तहत अपराध तभी माना जाएगा जब दो शर्तें पूरी हों कि पुरुष ने महिला के साथ संबंध बनाने के लिए धोखाधड़ी या छल का सहारा लिया हो। शादी का वादा करते समय पुरुष की मंशा शुरू से ही शादी करने की न रही हो।
यह था मामला?
नोएडा के सेक्टर 63 थाने में एक युवती ने नीलेश रामचंद्रानी और उनके परिवार के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। युवती का आरोप था कि नीलेश ने शादी का वादा करके उसके साथ संबंध बनाए और बाद में मुकर गया।
कोर्ट की जांच में क्या निकला?
- सहमति से संबंध: जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अब्दुल शाहिद की बेंच ने पाया कि दोनों के बीच संबंध आपसी पसंद और सहमति से थे, न कि किसी धोखे की वजह से।
- शादी की आपसी रजामंदी: कोर्ट ने नोट किया कि दोनों परिवारों के बीच शादी लगभग तय हो चुकी थी, लेकिन बाद में कुछ मतभेदों के कारण रिश्ता टूट गया।
- कोई एकतरफा वादा नहीं: अदालत ने कहा कि यहाँ शादी का समझौता दोनों पक्षों के बीच था, नीलेश ने कोई ऐसा “झूठा वादा” नहीं किया था जिसे वह शुरू से पूरा नहीं करना चाहता था।
BNS धारा 69 पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
- हाई कोर्ट का ऑब्जर्वेशन: “इस मामले में FIR तब दर्ज कराई गई जब याचिकाकर्ता को लगा कि किन्हीं कारणों से शादी संभव नहीं है। सबूतों से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता की ओर से कोई छल या झूठा वादा नहीं था।”
- FIR रद्द: कोर्ट ने धारा 69 के तहत दर्ज आरोपों को खारिज कर दिया।
- गिरफ्तारी पर रोक: कोर्ट ने निर्देश दिया कि अन्य धाराओं में जांच जारी रह सकती है, लेकिन याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।





