Delhi High Court
Pending Legal case: नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) के ताजा आंकड़ों ने दिल्ली की निचली अदालतों (Trial Courts) में न्याय की धीमी रफ्तार की एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है।
यह है अहम आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली की जिला अदालतों में 15.8 लाख से अधिक मामले लंबित हैं। इस भारी बैकहॉग के पीछे अदालती कार्यवाही पर रोक (Stay) और वकीलों की अनुपलब्धता को सबसे बड़े कारणों के रूप में चिह्नित किया गया है।
पेंडेंसी का लेखा-जोखा
कहाँ कितने केस अटके?
कुल 15,85,216 लंबित मामलों का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है:
केस का प्रकार लंबित मामलों की संख्या
मजिस्ट्रेट केस 10,05,813 (सबसे अधिक)
विविध आपराधिक आवेदन 2,92,670
दीवानी मुकदमे 96,495
सेशन केस 40,964
मोटर एक्सीडेंट क्लेम 20,043
वैवाहिक विवाद 15,502
इसके अलावा औद्योगिक विवाद, मध्यस्थता (Arbitration) और आपराधिक अपीलों के भी हजारों मामले कतार में हैं।
देरी की 5 मुख्य वजह
- NJDG के रियल-टाइम डेटा ने उन कारणों का भी खुलासा किया है जिनकी वजह से फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
- वकीलों की अनुपलब्धता: सबसे बड़ा कारण। करीब 3.27 लाख मामले इसलिए लंबित हैं क्योंकि वकील पेश नहीं हो सके।
- अदालती रोक (Stay): लगभग 2.17 लाख मामले विभिन्न कारणों से स्टे ऑर्डर के तहत रुके हुए हैं।
- आरोपियों का फरार होना: 26,123 मामलों में आरोपी कानून की पकड़ से बाहर (Absconding) हैं।
- दस्तावेजों की कमी: 20,571 केस जरूरी कागजात के इंतजार में अटके हैं।
- गवाहों की कमी: 9,183 मामलों में गवाह उपलब्ध न होने के कारण ट्रायल आगे नहीं बढ़ रहा है।
पुराने बनाम नए मामले
- डेटा के आयु-वार विश्लेषण (Age-wise Analysis) से पता चलता है कि बैकहॉग का बड़ा हिस्सा हाल के वर्षों का है।
- 2022 में दायर 1.51 लाख मामले अभी भी लंबित हैं।
- 2021 के 72,774 और 2020 के 45,970 मामले कतार में हैं।
- 2016 और उससे पहले के पुराने मामलों की संख्या नए मुकदमों की तुलना में कम है, जो दर्शाता है कि हालिया वर्षों में मुकदमों की बाढ़ आई है।
- वर्तमान में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 590 और सुप्रीम कोर्ट द्वारा 42 मामलों पर स्टे लगाया गया है।






