a woman with a child
Unwanted pregnancy: प्रजनन स्वायत्तता (Reproductive Autonomy) और महिला के अपने शरीर पर अधिकार को सर्वोपरि रखा गया है।
30 हफ्ते के गर्भ के मेडिकल टर्मिनेशन (MTP) की अनुमति दे दी है
सुप्रीम कोर्ट ने ने एक ऐसी लड़की को 30 हफ्ते के गर्भ के मेडिकल टर्मिनेशन (MTP) की अनुमति दे दी है, जो नाबालिग रहते हुए गर्भवती हुई थी।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां: “स्वायत्तता सबसे ऊपर”
- जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया।
- मजबूर नहीं कर सकते: कोई भी अदालत किसी महिला को—और खासकर एक नाबालिग को—उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ को जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
- अनुच्छेद 21 का हिस्सा: कोर्ट ने दोहराया कि प्रजनन का चुनाव और स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है।
- अभिभावक बनाम नाबालिग: यदि नाबालिग गर्भवती की राय उसके अभिभावक (Guardian) से अलग है, तो अदालत को गर्भवती व्यक्ति के दृष्टिकोण को प्राथमिकता देनी चाहिए।
जस्टिस नागरत्ना के सामने कानूनी और नैतिक दुविधा
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने इस मामले की जटिलता को स्वीकार करते हुए कहा, हमारे लिए भी यह तय करना कठिन है। क्या हमें उसे बच्चा पैदा करने के लिए मजबूर करना चाहिए? क्योंकि जो बच्चा पैदा होगा वह भी आखिरकार एक जीवन होगा। लेकिन मुख्य बात यह है कि वह मां नहीं बनना चाहती और उसने लगातार अपनी अनिच्छा व्यक्त की है। अदालत ने सवाल उठाया कि यदि कानून 24 हफ्तों तक अनुमति देता है, तो उन परिस्थितियों में 30 हफ्तों पर रोक क्यों हो, जहाँ महिला स्पष्ट रूप से गर्भावस्था नहीं चाहती?
अदालत का आदेश
- मुंबई के जेजे अस्पताल (JJ Hospital) को निर्देश दिया गया है कि वे सभी चिकित्सा सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए गर्भ का समापन (Termination) करें।
- समानता का अधिकार: कोर्ट ने अपने 2022 के फैसले का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि विवाहित और अविवाहित, सभी महिलाएं 24 सप्ताह तक गर्भपात की हकदार हैं। इस मामले में विशेष परिस्थितियों के कारण 30 सप्ताह पर अनुमति दी गई है।






