Wednesday, October 7, 2026
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Institutions not be defunct: ट्रिब्यूनल सुधार पर सुप्रीम कोर्ट सख्त…संस्थानों को ठप न होने दें

Institutions not be defunct: देश के अर्ध-न्यायिक निकायों (Quasi-judicial bodies) की बदहाली और खाली पदों के संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सोमवार को सरकार से कहा कि वह देशभर के सभी ट्रिब्यूनल्स के प्रबंधन के लिए 4 हफ्ते के भीतर एक व्यापक और समान प्रस्ताव (Uniform Proposal) पेश करे।

“संस्थानों को अपंग न बनने दें”

मद्रास बार एसोसिएशन मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से कहा कि सरकार को पिछले न्यायिक आदेशों के अनुसार काम करना चाहिए।

कोर्ट ने स्पष्ट किया

  • Uniformity: सभी ट्रिब्यूनल के लिए एक जैसी व्यवस्था हो, चाहे वे संविधान के तहत बने हों या विशेष कानूनों के तहत।
  • Legislative Roadmap: सरकार बताए कि क्या वह नया कानून लाना चाहती है या मौजूदा नियमों में बड़े संशोधन करना चाहती है।
  • Stability: ट्रिब्यूनल्स को अधर में नहीं छोड़ा जा सकता।
  • CJI की टिप्पणी: “संस्थानों को निष्क्रिय (Defunct) मत होने दीजिए। हमें सभी ट्रिब्यूनल्स के लिए एक समग्र योजना (Holistic Scheme) दीजिए।”

अंतरिम राहत: कामकाज नहीं रुकेगा

  • खाली पदों की वजह से काम न रुके, इसके लिए कोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिए।
  • DRAT चेयरमैन का विस्तार: जस्टिस राजेश खरे ‘डेट रिकवरी अपीलेट ट्रिब्यूनल’ (DRAT) के अध्यक्ष बने रहेंगे।
  • कोलकाता DRAT: यहाँ के चेयरमैन को भी अगले आदेश तक पद पर बने रहने की अनुमति दी गई है ताकि ट्रिब्यूनल ठप न हो।

यह है विवाद की जड़: 2021 का कानून

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 19 नवंबर को ‘ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट 2021’ के कई अहम प्रावधानों को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि संसद मामूली बदलाव करके न्यायिक फैसलों को पलट नहीं सकती।

कोर्ट ने निम्नलिखित प्रावधानों को माना था अवैध

  • नियुक्ति के लिए 50 वर्ष की न्यूनतम आयु की शर्त।
  • अध्यक्षों और सदस्यों का केवल 4 साल का तय कार्यकाल।
  • चयन समिति (SCSC) द्वारा एक पद के लिए दो नामों के पैनल की सिफारिश (जिसे कार्यपालिका का हस्तक्षेप माना गया)।

नेशनल ट्रिब्यूनल्स कमीशन (NTC) की मांग

कोर्ट ने केंद्र को ‘नेशनल ट्रिब्यूनल्स कमीशन’ स्थापित करने का निर्देश दिया है। यह एक स्वतंत्र संस्था होगी जो ट्रिब्यूनल्स में नियुक्तियों, प्रशासन और कामकाज में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करेगी।

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