CYBER CRIMINALS: देश में बढ़ते साइबर अपराधों और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी नसीहत दी है।
जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने सोमवार को कहा कि सरकार को न केवल पीड़ितों की सुरक्षा करनी चाहिए, बल्कि उन्हें मुआवजा देने पर भी विचार करना चाहिए।
“TV-रेडियो पर सुनाएं ठगों की रिकॉर्डिंग”
अदालत ने कहा कि आम लोग, खासकर बुजुर्ग और अकेली महिलाएं इन शातिर अपराधियों के आसान शिकार बन रहे हैं।
यह दिए बेंच ने सुझाव
- Modus Operandi: साइबर अपराधी कैसे बात करते हैं और कैसे जाल बिछाते हैं, इसकी रिकॉर्डिंग TV और रेडियो पर सुनाई जाए।
- Education: जनता को जागरूक करना ही इस समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।
- Confidence: अकेले रह रहे बुजुर्गों का भरोसा बढ़ाएं और उन्हें ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए ट्रेनिंग दें।
- कोर्ट की टिप्पणी: “ये अपराधी लाखों नहीं, लोगों की जीवन भर की कमाई (करोड़ों रुपये) लूट रहे हैं। जनता को शिक्षित करें कि किस तरह की कॉल्स को इग्नोर करना है।”
आरोपी परमजीत खर्ब को मिली जमानत
यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान आई जिसमें आरोपी परमजीत खर्ब पर ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ (किराये के खाते) बनाकर साइबर ठगों को बेचने का आरोप है। कोर्ट ने उसे शर्तों के साथ जमानत दे दी है, क्योंकि इस मामले के अन्य आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी थी। हालांकि, सरकारी वकील (ASG) ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है।
ASG ने कहा, वह खुद हुए ठगी के शिकार
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. डी. संजय ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने ‘Sanchar Saathi’ ऐप लॉन्च किया है, जहाँ लोग साइबर क्राइम और फोन चोरी की रिपोर्ट कर सकते हैं। ASG ने खुद का उदाहरण देते हुए माना कि ये ठग इतने शातिर हैं कि वे खुद भी एक बार इनका शिकार होने से बाल-बाल बचे।
‘डिजिटल अरेस्ट’ पर सुओ मोटो संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट पहले से ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ के बढ़ते मामलों पर खुद संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। हाल ही में कोर्ट ने CBI को देशव्यापी जांच के आदेश दिए थे और साइबर ठगी के जरिए ₹54,000 करोड़ की हेराफेरी को “डकैती” करार दिया था।

