Vague affidavit: गुजरात हाई कोर्ट ने शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान भरूच के जिला कलेक्टर को कड़ी फटकार लगाई।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी.एन. राय की बेंच भरूच जिले में अमोनियम नाइट्रेट (एक अत्यधिक विस्फोटक पदार्थ) के भंडारण और प्रसंस्करण इकाइयों द्वारा सुरक्षा मानदंडों के उल्लंघन के आरोपों पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने कलेक्टर द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे (Affidavit) को “अस्पष्ट” और “लापरवाह” करार देते हुए उन्हें “अनपढ़” (Illiterate) तक कह दिया।
कोर्ट की नाराजगी की वजह: “अपनी शक्तियों का ज्ञान नहीं”
- कलेक्टर ने कोर्ट में जो हलफनामा पेश किया, उसमें यह स्पष्ट नहीं था कि किन इकाइयों ने नियमों का उल्लंघन किया और उन पर क्या कार्रवाई की गई। इस पर चीफ जस्टिस अग्रवाल ने तल्ख टिप्पणी की।
- कड़ी फटकार: “तो आप एक अनपढ़ व्यक्ति हैं। आप कलेक्टर हैं… लेकिन आप अनपढ़ हैं। आपको उन नियमों की जानकारी नहीं है जिनका आपको पालन करना चाहिए… उन्हें पता ही नहीं है! अपनी शक्तियों के बारे में भी उन्हें नहीं पता!”
- अस्पष्ट रिपोर्ट: कोर्ट ने कहा कि कलेक्टर के हलफनामे में 2025 और 2026 की पिछली रिपोर्टों पर की गई किसी भी कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड नहीं था।
अमोनियम नाइट्रेट: एक ‘खतरनाक’ रसायन
- याचिका में चेतावनी दी गई थी कि अमोनियम नाइट्रेट के मामले में जरा सी भी लापरवाही ‘भोपाल गैस त्रासदी’ जैसे विनाशकारी परिणाम ला सकती है।
- नियम: यह पदार्थ ‘खतरनाक रसायन नियम, 1989’ और ‘अमोनियम नाइट्रेट नियम, 2012’ के अंतर्गत आता है।
- अधिकार: इन नियमों को लागू करने की प्राथमिक जिम्मेदारी PESO (पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन) के साथ-साथ जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) और स्थानीय पुलिस की होती है।
सरकारी वकील को भी दी नसीहत
- कोर्ट ने कलेक्टर का बचाव कर रहे सरकारी वकील को भी नहीं बख्शा। कहा, अधिकारियों का मुखपत्र न बनें”: कोर्ट ने कहा, “आप अधिकारियों के मुखपत्र (Mouthpiece) नहीं हैं। इस तरह का हलफनामा दाखिल करके आप अधिकारियों की आवाज बन रहे हैं, जबकि आप एक वकील हैं।
- धैर्य की सीमा: बेंच ने कहा, “हम धैर्य रख रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमें हल्के में ले सकते हैं।”
कोर्ट के कड़े निर्देश (Future Action)
| निर्देश | विवरण |
| नई जांच | अंकलेश्वर के मामलातदार और कार्यकारी मजिस्ट्रेट को सभी इकाइयों का नए सिरे से निरीक्षण करने का आदेश। |
| स्वतंत्र समीक्षा | कलेक्टर को इन निष्कर्षों की स्वतंत्र रूप से जांच करने और एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) पेश करने को कहा गया है। |
| हलफनामा | कोर्ट ने पुराने हलफनामे को वापस लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया और नया हलफनामा माँगा है। |
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
गुजरात हाई कोर्ट का यह कड़ा रुख प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक बड़ा सबक है। जब मामला जन सुरक्षा और विस्फोटकों से जुड़ा हो, तो अदालतें किसी भी प्रकार की प्रशासनिक सुस्ती या “अस्पष्ट” जवाबों को बर्दाश्त नहीं करतीं। कोर्ट ने साफ कर दिया कि संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों का पूरा ज्ञान होना अनिवार्य है।

