Wednesday, October 28, 2026
HomeDelhi-NCRForgery Case Verdict: 32 साल बाद राष्ट्रपति भवन रिकॉर्ड जालसाजी मामला…गजब है...

Forgery Case Verdict: 32 साल बाद राष्ट्रपति भवन रिकॉर्ड जालसाजी मामला…गजब है कि केवल अटकलें थीं और सबूत कुछ नहीं, आगे यह हुआ

Forgery Case Verdict: दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में देश के सबसे पुराने लंबित आपराधिक मामलों में से एक राष्ट्रपति भवन रिकॉर्ड जालसाजी मामला, में सभी जीवित आरोपियों को बरी कर दिया है।

एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ज्योति माहेश्वरी ने मोहन लाल जाटिया, अशोक जाटिया और अशोक जैन को आपराधिक साजिश, सबूतों को गढ़ने और जालसाजी के सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। यह मामला लगभग 32 साल पुराना था और इसकी शुरुआत 1994 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर हुई थी।

मामले की पृष्ठभूमि (The 1986 COFEPOSA Connection)

  • शुरुआत: यह मामला 1986 में शुरू हुआ था जब मोहन लाल जाटिया को विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी निवारण अधिनियम (COFEPOSA) के तहत हिरासत में लिया गया था।
  • सुप्रीम कोर्ट में दावा: जाटिया ने अपनी हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि उन्होंने भारत के राष्ट्रपति को एक प्रतिवेदन (Representation) भेजा था, जिस पर विचार नहीं किया गया।
  • संदेह: इस दावे की प्रामाणिकता पर संदेह होने के बाद आरोप लगा कि राष्ट्रपति सचिवालय के रिकॉर्ड में फर्जी प्रविष्टियां (Entries) की गई थीं ताकि यह दिखाया जा सके कि डाक प्राप्त हुई थी।

CBI की थ्योरी और कोर्ट का निष्कर्ष

  • 1994 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच CBI को सौंपी थी।
  • CBI का तर्क: सचिवालय के ‘डाक रजिस्टर’ में बाद में एक फर्जी एंट्री डाली गई थी। फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के आधार पर इसे ‘जालसाजी’ बताया गया।
  • कोर्ट का फैसला: अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) आरोपों को “संदेह से परे” (Beyond reasonable doubt) साबित करने में विफल रहा।
  • अहम टिप्पणी: कोर्ट ने कहा, “प्रॉसिक्यूशन का केस कानूनी सबूतों के बजाय केवल अटकलों और अनुमानों (Conjectures and Inferences) पर आधारित है।”

देरी का न्याय पर असर (Impact of a Protracted Trial)

  • जज माहेश्वरी ने इस मामले के 32 सालों तक खिंचने पर चिंता जताई।
  • गवाहों की मृत्यु: इस दौरान दो आरोपी (मिलाप चंद जगोत्रा और गुरचरण सिंह), जो राष्ट्रपति सचिवालय में कार्यरत थे, की मृत्यु हो गई और उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त (Abate) कर दी गई।
  • साक्ष्यों का अभाव: कोर्ट ने माना कि यदि ट्रायल इतना लंबा न चलता, तो शायद अधिक भौतिक साक्ष्य सामने आ पाते और सच्चाई का पता लगाना आसान होता।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
मामले की उम्र32 साल (देश के सबसे पुराने मामलों में से एक)।
मुख्य आरोपीमोहन लाल जाटिया, अशोक जाटिया और अशोक जैन।
जांच एजेंसीकेंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)।
बरी होने का आधारप्रत्यक्ष सबूतों की कमी और अभियोजन पक्ष की थ्योरी में विरोधाभास।

देर से मिला न्याय…

यह मामला भारतीय न्यायिक प्रणाली की सुस्त रफ़्तार और कानूनी सबूत की महत्ता को दर्शाता है। 32 साल बाद आए इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया कि किसी पर केवल संदेह होने से उसे सजा नहीं दी जा सकती, चाहे वह मामला राष्ट्रपति भवन जैसे उच्च संस्थान से ही क्यों न जुड़ा हो।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
27.7 ° C
27.7 °
27.7 °
51 %
0.8kmh
100 %
Wed
29 °
Thu
22 °
Fri
21 °
Sat
28 °
Sun
29 °

Recent Comments