Punjab and Haryana High Court
Contempt Notice: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने वकील रवनीत कौर को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया है।
न्यायिक व्यवस्था की गरिमा पर हमला
वकील रवनीत कौर ने खुद पेश होकर हाईकोर्ट के मौजूदा जजों और एक ट्रायल कोर्ट के जज पर गंभीर और आपत्तिजनक आरोप लगाए थे। कोर्ट ने इसे न्यायिक व्यवस्था की गरिमा पर हमला और न्यायाधीशों को डराने की कोशिश बताया। रवनीत कौर ने सीआरपीसी की धारा 482 (अब बीएनएसएस की धारा 528), एससी/एसटी एक्ट की धारा 15(6)(b) और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 के तहत याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने अपने मुख्य केस की सुनवाई की तारीख 31 अक्टूबर 2025 से पहले करने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर केस में देरी की जा रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है। याचिका में उन्होंने धमकी दी कि अगर केस जल्दी नहीं सुना गया तो वे सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर जजों को फंसा देंगी।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की टिप्पणाी
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि याचिकाकर्ता के आरोप निराधार और अदालत की अवमानना के दायरे में आते हैं। उन्होंने कहा कि रवनीत कौर एक योग्य वकील हैं, इसलिए उन्हें ऐसे आरोपों के परिणामों की जानकारी होनी चाहिए थी। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले (M.Y. Shareef बनाम नागपुर हाईकोर्ट, 1955) का हवाला देते हुए कहा कि वकील अगर आपत्तिजनक सामग्री पर दस्तखत करता है तो वह अवमानना का दोषी हो सकता है।
न्यायपालिका को डराने की कोशिश
कोर्ट ने कहा कि रवनीत कौर का यह व्यवहार जजों को डराने और न्यायिक प्रक्रिया में दखल देने की कोशिश है। अगर ऐसे व्यवहार पर रोक नहीं लगी तो इससे जनता का न्यायपालिका पर भरोसा कमजोर हो सकता है। कोर्ट ने कहा, “अदालतों की गरिमा को चुनौती देना कानून के शासन की नींव को हिला सकता है।”
देरी की वजह बताई
कोर्ट ने बताया कि यह मामला पहले किसी और बेंच के पास था, लेकिन उस बेंच के अलग होने के बाद केस ट्रांसफर हुआ। 14 जुलाई 2025 को केस भारी काम के चलते नहीं सुना जा सका, क्योंकि उस दिन ‘मेडिएशन नेशन ड्राइव’ के तहत कई केस सूचीबद्ध थे। इसलिए अगली तारीख 31 अक्टूबर 2025 दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि देरी जानबूझकर नहीं की गई थी।
अवमानना नोटिस जारी, केस की तारीख बदली
कोर्ट ने रवनीत कौर को अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत नोटिस जारी किया है और पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। हालांकि, कोर्ट ने न्यायहित में उनकी केस जल्दी सुनने की मांग स्वीकार कर ली और अगली सुनवाई की तारीख 29 अगस्त 2025 तय की है।







