BAR COUNCIL-POLLS: सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें राज्य बार काउंसिल चुनावों की निगरानी के लिए शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त ‘हाई-पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमेटी’ के खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा (जो बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं) ने इस मामले का उल्लेख किया।
“यह गंभीर मामला है”: मनन कुमार मिश्रा
मनन कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र और गोवा राज्य बार काउंसिल चुनावों की निगरानी कर रही उच्चाधिकार प्राप्त समिति के खिलाफ एक वकील ने FIR दर्ज कराई है। उन्होंने तर्क दिया, “यह बहुत ही जरूरी मामला है। एक वकील ने सिर्फ इसलिए समिति के खिलाफ FIR दर्ज करा दी क्योंकि उसकी अपील पर विचार नहीं किया गया था। यह गंभीर स्थिति है।” मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हम इसे मंगलवार के लिए सूचीबद्ध (List) करेंगे।”
हाई-पावर्ड कमेटी का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इस विशेष पैनल का गठन किया था। इस समिति में अध्यक्ष जस्टिस सुधांशु धूलिया (सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश), सदस्य जस्टिस रवि शंकर झा (पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश), वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि शामिल हैं।
पृष्ठभूमि और कोर्ट के पिछले आदेश
- 18 फरवरी का आदेश: शीर्ष अदालत ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया था कि राज्य बार काउंसिल चुनावों से संबंधित किसी भी नई याचिका को सीधे सूचीबद्ध न किया जाए। इसके बजाय, किसी भी शिकायत के लिए प्रभावित पक्षों को इसी समिति के पास जाने को कहा गया था।
- डेडलाइन: देश भर में सभी राज्य बार काउंसिल चुनावों को समय पर और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए अंतिम समय-सीमा 31 जनवरी, 2026 तय की गई है।


