Sunday, July 26, 2026
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केंद्र लाएगा नया ‘ट्रिब्यूनल बिल’….ट्रिब्यूनल सदस्यों के कार्यकाल 8 सितंबर तक बढ़ा, पढ़ें आदेश

अटॉर्नी जनरल (AG) ने कोर्ट को बताया, सरकार वर्तमान बजट सत्र या आगामी मानसून सत्र में नया ट्रिब्यूनल बिल पेश कर सकती है।

Tribunal members: सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न न्यायाधिकरणों (Tribunals) के अध्यक्षों और सदस्यों का कार्यकाल 8 सितंबर 2026 तक बढ़ाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने यह फैसला अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी के उस आश्वासन के बाद लिया, जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार ट्रिब्यूनल के कामकाज और नियुक्तियों के लिए एक नया विधेयक (Bill) लाने पर विचार कर रही है। उधर, यह विस्तार उन सदस्यों के लिए है जो जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले थे।

नया कानून और कार्यकाल विस्तार

अटॉर्नी जनरल (AG) ने कोर्ट को बताया, सरकार वर्तमान बजट सत्र या आगामी मानसून सत्र में नया ट्रिब्यूनल बिल पेश कर सकती है। कामकाज में किसी भी तरह की बाधा या भ्रम से बचने के लिए, रिटायर होने वाले लगभग 21 सदस्यों को 8 सितंबर तक विस्तार दिया गया है। नया कानून पिछले साल (नवंबर 2025) सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021’ के कुछ प्रावधानों को रद्द किए जाने के बाद पैदा हुई स्थिति को सुधारेगा।

“जवाबदेही किसकी?” – CJI ने उठाए गंभीर सवाल

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने ट्रिब्यूनल्स की कार्यप्रणाली और उनकी जवाबदेही (Accountability) की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, वे न तो सरकार के प्रति जवाबदेह हैं और न ही हमारे प्रति। उनकी ईमानदारी और प्रदर्शन का मूल्यांकन कौन करेगा? अगर उनका काम मानक के अनुरूप नहीं है, तो उनका कार्यकाल क्यों बढ़ाया जाना चाहिए? कोई तो तंत्र होना चाहिए।

मुख्य चिंताएं और टिप्पणियां

जजमेंट आउटसोर्सिंग: इससे पहले 26 फरवरी को कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि ट्रिब्यूनल “लायबिलिटी” (बोझ) बन गए हैं। यहां तक कि एक वित्तीय ट्रिब्यूनल के तकनीकी सदस्यों द्वारा ‘जजमेंट लिखवाने का काम आउटसोर्स’ करने की बात भी सामने आई थी।

प्रशासनिक बनाम न्यायिक सदस्य: CAT बार एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन ने मुद्दा उठाया कि न्यायिक सदस्यों के रिटायर होने पर प्रशासनिक सदस्यों को ‘कार्यकारी अध्यक्ष’ बना दिया जाता है, जो चिंताजनक है।

निगरानी तंत्र: CJI ने सुझाव दिया कि जब कोई बेंच फैसला सुरक्षित (Reserve) रखती है, तो इसकी गोपनीय जानकारी अध्यक्ष को दी जानी चाहिए ताकि पता रहे कि फैसला कौन लिख रहा है और कितना समय लग रहा है।

अगला कदम

सुप्रीम कोर्ट इस मामले की प्रगति की समीक्षा के लिए मई में अगली सुनवाई करेगा। कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि महत्वपूर्ण ट्रिब्यूनल्स में कामकाज का कोई संकट पैदा न हो।

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