Capital Pollution: दिल्ली-NCR की हवा सुधारने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से उन प्रस्तावों पर जवाब मांगा है, जिनमें सभी कोयला आधारित उद्योगों (Coal-based industries) को NCR से बाहर शिफ्ट करने की बात कही गई है।
कोर्ट के बड़े फैसले और निर्देश
- नए पावर प्लांट पर रोक: कोर्ट उस सुझाव पर विचार कर रहा है जिसके तहत दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में अब कोई भी नया कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट नहीं लगाया जा सकेगा।
- मंत्रालयों से जवाब तलब: चीफ जस्टिस सूर्या कांत की बेंच ने पर्यावरण, ऊर्जा और पेट्रोलियम मंत्रालयों (MoEFCC, Power & MoPNG) से इस पर विस्तृत प्रस्ताव मांगा है।
- राज्यों को आदेश: उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सरकार को निर्देश दिया गया है कि वे पब्लिक नोटिस जारी कर उद्योगों और जनता से इस बदलाव पर सुझाव और आपत्तियां मांगें।
प्रदूषण के खिलाफ ‘एक्शन प्लान’
- सुप्रीम कोर्ट ने CAQM (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) की सिफारिशों को लागू करने के लिए सख्त डेडलाइन तय की है।
- वैकल्पिक ईंधन (Alternative Fuel): पेट्रोलियम मंत्रालय को पहचान करनी होगी कि इन उद्योगों के लिए कोयले की जगह कौन सा सुरक्षित ईंधन इस्तेमाल किया जा सकता है।
- वाहनों का प्रदूषण: कोर्ट 12 मार्च को गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण के मुद्दे पर विस्तार से सुनवाई करेगा।
- पराली और धूल: निर्माण कार्यों (C&D) से उड़ने वाली धूल, पराली जलाने की रोकथाम और वृक्षारोपण जैसे दीर्घकालिक उपायों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का आदेश दिया गया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
बेंच ने साफ किया कि राज्यों द्वारा जारी किए जाने वाले नोटिस को “कोर्ट का आदेश” माना जाए। दिल्ली सरकार और अन्य एजेंसियों को CAQM के लॉन्ग-टर्म सुझावों पर अपनी ‘Action Taken Report’ पेश करनी होगी।

