a woman holding a cheque
Cheque Dishonour: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 142(ब) के तहत शिकायत दर्ज करने के लिए निर्धारित 30 दिनों की समयसीमा अनिवार्य है।
देरी माफी (condonation of delay) का औपचारिक आवेदन जरूरी
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने एक चेक बाउंस शिकायत खारिज कर दी, क्योंकि वह 30 दिन की वैधानिक अवधि पार करके 35वें दिन दाखिल की गई थी। न तो शिकायत के साथ देरी माफी का आवेदन लगाया गया था और न ही अदालत ने देरी को लेकर कोई न्यायिक आदेश दिया था। अदालत ने कहा, अगर यह समयसीमा पार हो जाती है, तो केवल तभी शिकायत स्वीकार्य होगी जब उसके साथ देरी माफी (condonation of delay) का औपचारिक आवेदन लगाया गया हो और अदालत ने उसे कारणों के आधार पर उचित ठहराया हो।
अपील स्वीकार कर शिकायत खारिज कर दी
अदालत ने कहा कि शिकायत देर से दाखिल होने पर “स्वतः या अनुमान के आधार पर” देरी माफ नहीं मानी जा सकती। प्रत्येक मामले में, देरी के कारणों का स्वतंत्र रूप से परीक्षण कर न्यायिक निष्कर्ष निकालना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा, “यदि यह मान भी लिया जाए कि धारा 142 के तहत अदालत के पास देरी माफ करने की शक्ति है, तो पहला कदम यह है कि अदालत पहले यह नोटिस ले कि शिकायत समयसीमा से बाहर दायर की गई है। उसके बाद उसे यह देखना होगा कि शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए कारण इतने पर्याप्त हैं या नहीं कि देरी माफ की जा सके। केवल तब ही संज्ञान लेकर आगे बढ़ा जा सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट का वह निर्णय, जिसमें ट्रायल कोर्ट के समन जारी करने के आदेश को सही ठहराया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने गलत ठहराया। नतीजतन, अपील स्वीकार की गई और शिकायत खारिज कर दी गई।
CRIMINAL APPEAL NO. OF 2025 (Arising out of SLP(Crl.) No. 2002/2025)
H. S. OBEROI BUILDTECH PVT. LTD & ORS. APPELLANTS
A1 : H.S. OBEROI BUILDTECH PVT. LTD
A2 : H.S. OBEROI
A3 : MANVEER SINGH OBEROI
VERSUS
M/S MSN WOODTECH RESPONDENT







