EPFO Pension Rights: बॉम्बे हाई कोर्ट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के एक आदेश को रद्द करते हुए पेंशनभोगियों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है।
तकनीकी कमियों के कारण किसी कर्मचारी की पेंशन नहीं रोक सकते
हाईकोर्ट के जस्टिस अमित बोरकर की बेंच ने किरण राजाराम जाधव बनाम EPFO मामले में याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता एक फार्मासिस्ट हैं जिन्होंने लगभग 37 वर्षों तक सेवा दी थी, लेकिन तकनीकी आधार पर उनकी ‘हायर पेंशन’ (Higher Pension) की अर्जी खारिज कर दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एम्प्लॉयर (नियोक्ता) द्वारा रिकॉर्ड न रखने या तकनीकी कमियों के कारण किसी कर्मचारी की पेंशन नहीं रोकी जा सकती।
विवाद क्या था? (The Missing Records)
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश: 2022 के ऐतिहासिक फैसले के बाद, याचिकाकर्ता ने सितंबर 2023 में ऊँची पेंशन के लिए आवेदन किया था।
- EPFO का इनकार: मार्च 2025 में EPFO ने यह कहकर दावा खारिज कर दिया कि एम्प्लॉयर ने Form 6A और Challans जैसे जरूरी रिकॉर्ड जमा नहीं किए हैं।
- कर्मचारी की बेबसी: याचिकाकर्ता का तर्क था कि इन दस्तावेजों के रख-रखाव पर कर्मचारी का कोई नियंत्रण नहीं होता, यह पूरी तरह कंपनी की जिम्मेदारी है।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: पेंशन कोई खैरात नहीं
- अदालत ने EPFO के ‘कठोर और संकीर्ण’ (Rigid & Narrow) रवैये की आलोचना की।
- कल्याणकारी उपाय: “पेंशन कानून का उद्देश्य बाधाएं पैदा करना नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद के लाभ को सुरक्षित करना है। यह एक कल्याणकारी उपाय (Welfare Measure) है, कोई विवेकाधीन लाभ (Discretionary Benefit) नहीं।”
- विकल्प मौजूद हैं: कोर्ट ने नोट किया कि यदि Form 6A नहीं है, तो भी Form 3A, EPF अकाउंट स्टेटमेंट और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड से सत्यापन (Verification) किया जा सकता है।
- न्याय का सिद्धांत: केवल नियोक्ता की ओर से रिकॉर्ड की कमी के कारण किसी कर्मचारी को नुकसान में नहीं रखा जा सकता।
कोर्ट के मुख्य निर्देश (The Final Order)
- हाई कोर्ट ने EPFO के 28 मार्च, 2025 के आदेश को क्वाश (Quash) कर दिया और कई निर्देश दिए।
- पुनर्विचार (Reconsideration): EPFO को याचिकाकर्ता के दावे पर फिर से विचार करना होगा।
- दस्तावेजों का लचीलापन: सत्यापन के लिए केवल Form 6A पर निर्भर रहने के बजाय Form 3A और उपलब्ध बैंक/खाता विवरणों का उपयोग किया जाए।
- समय सीमा: यह पूरी प्रक्रिया 8 सप्ताह के भीतर पूरी होनी चाहिए और पात्रता साबित होने पर सभी लाभ जारी किए जाने चाहिए।
यह रहा अदालत का निष्कर्ष: पेंशनर्स के लिए बड़ी जीत
यह फैसला उन हजारों पेंशनभोगियों के लिए उम्मीद की किरण है जिनकी पेंशन पुरानी कंपनियों के रिकॉर्ड न होने या तकनीकी खामियों के कारण अटकी हुई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ‘डिजिटल ट्रांजिशन’ या कागजी कमियों का बोझ कर्मचारी के कंधों पर नहीं डाला जा सकता।
IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE AT BOMBAY
CIVIL APPELLATE JURISDICTION
WRIT PETITION NO. 632 OF 2026
CORAM : AMIT BORKAR, J.
Kiran Rajaram Jadhav
V/s.
The Employees Provident Fund
Organisation (EPFO) & Haffkine Bio- Pharmaceutical
Corporation Limited

