Supreme Court in view
Falsely projecting: खुद को सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली वकील बताकर कई लोगों से ठगी कर ली गई।
सुप्रीम अदालत से फर्जी वकील के आराेपी को जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही करोड़ों रुपये लेने के आरोप में गिरफ्तार लगभग 60 वर्षीय फर्जी वकील रूपी महिला को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने पूनम चरनदास खन्ना की विशेष अनुमति याचिका स्वीकार करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के जमानत से इनकार करने वाले आदेश को रद्द कर दिया। पीठ ने लंबी हिरासत और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए जमानत मंजूर की। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट उचित शर्तों पर रिहा करे, वह सुनवाई में सहयोग करें और शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द की जा सकती है।
यह था मामला
खन्ना को मुंबई के खेरवाड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर नंबर 34/2020 के तहत आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 406 (आपराधिक विश्वासघात) सहपठित धारा 34 के तहत गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उन्होंने खुद को सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली योग्य अधिवक्ता बताकर लोगों से बड़ी रकम ली। अभियोजन के अनुसार, बिल्डर अशोक मोहनानी से उन्होंने कानूनी फीस के नाम पर 15 लाख रुपये मांगे, जिनमें से 10 लाख अग्रिम लिए गए। इसके अलावा, बिजली ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए कानूनी कार्यवाही शुरू कराने के नाम पर 3 करोड़ रुपये की मांग की गई, जिसमें से कथित तौर पर 2.11 करोड़ पर सहमति बनी। एक एमओयू भी किया गया और 51 लाख व 20 लाख रुपये की दो किस्तें ली गईं, लेकिन कोई कानूनी कार्यवाही शुरू नहीं की गई।
महिला 29 जनवरी 2024 से न्यायिक हिरासत में थीं
महिला 29 जनवरी 2024 से न्यायिक हिरासत में थीं। हाईकोर्ट ने 8 दिसंबर 2025 को उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि वह वृद्ध हैं, दो वर्ष से अधिक समय से हिरासत में हैं और मुकदमे की सुनवाई धीमी है—12 में से 8 गवाहों की ही जांच हुई है। अपराधों की अधिकतम सजा 7 वर्ष है।
IN THE SUPREME COURT OF INDIA
CRIMINAL APPELLATE JURISDICTION CRIMINAL APPEAL NO. ::::: OF 2026 (@ Special Leave Petition (Crl.) No.21380/2025)
POONAM CHARANDAS KHANNA …APPELLANT(S)
VERSUS
STATE OF MAHARASHTRA ….RESPONDENT(S)






