Financial reporting: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) को कुछ चीजें सुनिश्चित करने की सलाह दी है।
सीआईसी ने कहा, ऑडिट प्रथाओं और मानकों को प्रभावित करने वाले सभी आदेशों, निर्देशों, सर्कुलर और नीतिगत निर्णयों को सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) में रखा जाए। सूचना आयोग की यह टिप्पणी RTI अधिनियम के तहत दायर एक दूसरी अपील का निपटारा करते हुए आई। इस अपील में उन दस्तावेजों की मांग की गई थी, जिनमें NFRA ने ऑडिटर्स या ऑडिट फर्मों को मौखिक सुनवाई के दौरान कानूनी वकील (Legal Counsel) के माध्यम से अपनी बात रखने की अनुमति दी थी।
NFRA की भूमिका और पारदर्शिता की आवश्यकता
NFRA की स्थापना सरकार द्वारा 2018 में कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत की गई थी। इसका मुख्य काम ऑडिटर्स को विनियमित करना और कंपनियों द्वारा लेखांकन (Accounting) व ऑडिटिंग मानकों के पालन की निगरानी करना है। सूचना आयुक्त पी. आर. रमेश ने अपने आदेश में कहा, “NFRA वित्तीय विवरणों (Financial Statements) की विश्वसनीयता की रक्षा करता है, जिस पर निवेशक, ऋणदाता, नियामक और आम जनता भरोसा करती है।”आयोग ने ऑडिट से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वित्तीय रिपोर्टिंग में विश्वास मजबूत करने और जनहित की रक्षा के लिए ऑडिट मानकों को प्रभावित करने वाले निर्णयों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
RTI अधिनियम की बाध्यता
- आयोग ने प्राधिकरण को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत उसके कर्तव्यों की याद दिलाया।
- प्रतिवादी (NFRA) धारा 4 के प्रावधानों के तहत अपनी वेबसाइट पर जानकारी प्रकाशित करने के लिए बाध्य है।
- धारा 4(1)(b) और 4(1)(c) के तहत जानकारी वेबसाइट पर होनी चाहिए ताकि जनता को सूचना पाने के लिए कम से कम RTI दाखिल करने की जरूरत पड़े।
मामले की पृष्ठभूमि
सुनवाई के दौरान, NFRA ने तर्क दिया कि अपीलकर्ता द्वारा मांगा गया दस्तावेज़ कोई ‘आदेश’ नहीं था, बल्कि कार्यवाही का सामना कर रहे ऑडिटर्स को कारण बताओ नोटिस के साथ जारी किया गया एक ‘आंतरिक नोट’ (Internal Note) था। आयोग ने इस दलील को स्वीकार करते हुए माना कि केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) द्वारा इस मामले में उचित जवाब दे दिया गया था, लेकिन साथ ही भविष्य के लिए पारदर्शिता की यह सलाह भी जारी की।


