Habeas Corpus Petition: मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा है कि यदि कोई विवाहित महिला अपनी मर्जी से किसी अन्य व्यक्ति के साथ चली जाती है, तो पति द्वारा दायर Habeas Corpus (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका के तहत कोई कानूनी उपचार नहीं दिया जा सकता।
जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश और जस्टिस पी. धनबल की पीठ एक व्यक्ति (मुरुगन) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसकी पत्नी और दो बच्चे (साढ़े 3 साल और 2 साल) 6 मार्च 2026 से लापता थे। हालांकि, अदालत ने इस मामले में साथ ले जाए गए दो छोटे बच्चों की सुरक्षा पर गहरी चिंता जताई है।
अदालत का कानूनी रुख: पत्नी की मर्जी, कानून की सीमा
- सुनवाई के दौरान जब यह तथ्य सामने आया कि पत्नी अपनी मर्जी से किसी तीसरे व्यक्ति के साथ चली गई है।
- पत्नी के संबंध में: “चूँकि पत्नी ने तीसरे प्रतिवादी के साथ संबंध विकसित किए हैं और वह उसके साथ जाना चाहती है, तो ‘हैबियस कॉर्पस’ याचिका में कुछ नहीं किया जा सकता। पति को उचित अदालत में अपनी पत्नी के खिलाफ अन्य कानूनी उपचारों (जैसे तलाक या वैवाहिक अधिकारों की बहाली) का सहारा लेना होगा।”
- बच्चों की चिंता: अदालत ने कहा कि वह उन दो मासूम बच्चों को लेकर अधिक चिंतित है, जिन्हें महिला अपने साथ ले गई है। बच्चों का हित और सुरक्षा सर्वोपरि है।
मैजिस्ट्रेट और पुलिस को सख्त निर्देश
- अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उथुमलाई पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर को निर्देश दिए हैं।
- तलाश: पत्नी और दोनों बच्चों का पता लगाकर उन्हें जल्द से जल्द न्यायिक मजिस्ट्रेट, अलंगुलम के समक्ष पेश किया जाए।
- सूचना: जब भी उन्हें पेश किया जाए, याचिकाकर्ता (पति) मुरुगन को इसकी सूचना दी जाए।
- बयान दर्ज करना: मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया गया है कि वे पत्नी का बयान दर्ज करें और बच्चों से बात कर उनकी स्थिति का आकलन करें, फिर नियमानुसार आगे बढ़ें।
- रिपोर्ट: इस पूरी प्रक्रिया की एक रिपोर्ट हाई कोर्ट में दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता मुरुगन ने कोर्ट को बताया था कि उसकी पत्नी और बच्चे अचानक गायब हो गए हैं और पुलिस प्रभावी कदम नहीं उठा रही है। उसे डर था कि तीसरा प्रतिवादी उनके बच्चों को नुकसान पहुँचा सकता है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि यह मामला ‘अवैध संबंधों’ के कारण घर छोड़कर जाने का है। कोर्ट ने बच्चों के हितों की रक्षा के लिए मजिस्ट्रेट को जिम्मेदारी सौंपते हुए याचिका को बंद कर दिया है।
यह है Habeas Corpus (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका
यह एक विशेष अदालती आदेश (रिट) है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया हो। कोर्ट आदेश देता है कि उस व्यक्ति को शरीर के साथ (In person) अदालत में पेश किया जाए ताकि उसकी हिरासत की वैधता जांची जा सके।

