Habit of smoking: सुप्रीम कोर्ट ने सेना के एक पूर्व जवान की विकलांगता पेंशन (Disability Pension) की याचिका को खारिज कर दिया।
रोचक था मामला
दरअसल सेना के पेंशन की मांग वाली याचिका बड़ी ही रोचक थी। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसने पहले ही सैनिक के दावे को ठुकरा दिया था। अदालत ने मामले को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि उनके द्वारा झेला गया ‘ब्रेन स्ट्रोक’ सैन्य सेवा के कारण नहीं, बल्कि उनकी धूम्रपान की आदत के कारण था।
फैसले के मुख्य बिंदु
- व्यक्तिगत आदतों की जिम्मेदारी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘पेंशन रेगुलेशन फॉर द आर्मी’ के अनुसार, शराब, तंबाकू या नशीली दवाओं के सेवन से होने वाली बीमारी या मृत्यु के लिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता। ये कारक व्यक्ति के अपने नियंत्रण में होते हैं।
- मेडिकल रिपोर्ट का आधार: मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि जवान को हुआ ‘Stroke Ischemic RT MCA Territory’ (मस्तिष्क के दाहिने हिस्से में स्ट्रोक) लगातार धूम्रपान के कारण हुआ था।
- सेवा से संबंध नहीं: अदालत ने माना कि यह स्थिति न तो सैन्य सेवा की वजह से पैदा हुई और न ही कठिन सेवा शर्तों के कारण बिगड़ी।
यह होता है इस्केमिक स्ट्रोक?
अदालत ने मेडिकल साहित्य का हवाला देते हुए ‘इस्केमिक स्ट्रोक’ की प्रक्रिया को भी समझाया। कहा, यह तब होता है जब रक्त का थक्का या फैटी प्लाक (Fatty Plaque) मस्तिष्क की ओर जाने वाली धमनी को ब्लॉक कर देता है। इससे ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है और रक्त का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे मस्तिष्क के ऊतकों (Tissues) को नुकसान पहुँचता है। साथ ही यह प्रमुख जोखिम उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और एट्रियल फाइब्रिलेशन का कारक भी है।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
पीठ ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट देखने के बाद हमारे मन में कोई संदेह नहीं रह जाता कि यह बीमारी सैन्य सेवा से जुड़ी नहीं थी। दोनों रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि अपीलकर्ता को प्रतिदिन 10 बीड़ी पीने की आदत थी।

