Monday, February 16, 2026
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Hate speech: अफजल गुरु की तारीफ…न्यायपालिका से अभद्रता, सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया सख्त रवैया

Hate speech: सुप्रीम कोर्ट ने अफजल गुरु की तारीफ करने और सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया है।

अनुच्छेद 142 के तहत आदेश दिया: शीर्ष कोर्ट

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा, इनकी स्पीच में अफजल गुरु की तारीफ की गई, जो संसद हमले का मास्टरमाइंड था। साथ ही इन्होंने अयोध्या राम मंदिर पर आए फैसले, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कपड़ों, ईसाई त्योहारों, हिंदुओं द्वारा भस्म लगाने की परंपरा, सिखों द्वारा कृपाण रखने की धार्मिक मान्यता और मुस्लिम महिलाओं के हिजाब पहनने को लेकर भी विवादित बातें कहीं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए अनुच्छेद 142 के तहत यह आदेश दिया कि बेंगलुरु और तंजावुर की FIR को मादुरै ट्रांसफर किया जाए और तीनों मामलों की सुनवाई एक साथ स्थानीय अदालत में हो।

17 मार्च 2022 को मादुरै में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान भाषण दिया था

यह मामला तमिलनाडु तौहीद जमात के दो सदस्यों रहमतुल्ला और जमाल मोहम्मद से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि इन लोगों ने 17 मार्च 2022 को मादुरै में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान जो भाषण दिया, वह बेहद आपत्तिजनक था और इससे नफरत फैलाने वाले अपराध के सभी तत्व सामने आते हैं। कोर्ट ने 22 अप्रैल को दिए फैसले में कहा कि इन दोनों के खिलाफ कर्नाटक और तमिलनाडु में दर्ज तीन FIR को एक साथ जोड़ा जाएगा।

हेट स्पीच के आधार पर दर्ज हुई थीं तीन FIR

मादुरै के थल्लाकुलम पुलिस स्टेशन में 18 मार्च 2022 को एक सब-इंस्पेक्टर की शिकायत पर पहली FIR दर्ज हुई थी। उसी दिन तमिलनाडु के तंजावुर में भी एक FIR दर्ज की गई। तीसरी FIR 19 मार्च को बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में एक वकील की शिकायत पर दर्ज हुई।

याचिकाकर्ताओं ने कहा- एक ही आरोप में कई FIR नहीं हो सकतीं

दोनों आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि एक ही आरोप में कई FIR दर्ज करना कानूनन गलत है और यह संविधान के अनुच्छेद 20(2) के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने FIR को रद्द करने और तमिलनाडु की दोनों FIR को एक साथ जोड़ने की मांग की।

कोर्ट ने कहा- अलग-अलग ट्रायल से हो सकती है गड़बड़ी

कोर्ट ने कहा कि एक ही भाषण के आधार पर अलग-अलग जगहों पर ट्रायल चलाना न्याय के हित में नहीं होगा। इससे अलग-अलग फैसले आ सकते हैं, जो गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं। इसलिए तीनों FIR को मादुरै ट्रांसफर किया जाए और वहीं एक साथ ट्रायल हो।

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