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HC News: दिल्ली कहीं जोहांसबर्ग न बन जाए…आखिर हाईकोर्ट को क्याें करनी पड़ी ऐसी टिप्पणी, पढ़ें

HC News: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, जिस तरह से अवैध बोरवेल जलस्तर को नीचे गिरा रहे हैं, वह किसी पाप से कम नहीं है। क्या आपको पता है जोहांसबर्ग में क्या हुआ था? कुछ साल पहले उस शहर में महीनों तक पानी नहीं था। उन्हें भीषण जल संकट का सामना करना पड़ा था। क्या आप चाहते हैं कि दिल्ली भी वैसी स्थिति में पहुंचे?

निर्माण कार्य के लिए बोरवेल की अनुमति कैसे दे सकते हैं

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा, इस मामले में कुछ न कुछ रोक लगाने की आवश्यकता है। अदालत ने चिंता जताई कि ऐसे अवैध बोरवेल नहीं रोके गए, तो दिल्ली भी दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग जैसे जल संकट का सामना कर सकता है। कोर्ट ने नगर निकायों से यह भी सवाल किया कि वे निर्माण कार्य के लिए बोरवेल की अनुमति कैसे दे सकते हैं।

10 दिनों के भीतर इमारत का सर्वेक्षण करें

अधिवक्ता सुनील कुमार शर्मा की याचिका में आरोप लगाया था कि रोशनारा क्षेत्र की गोयनका रोड पर एक निर्माणाधीन इमारत में कई अवैध बोरवेल या सबमर्सिबल पंप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने इसे हटाने की मांग की थी। कोर्ट को बताया कि दिल्ली नगर निगम ने आरटीआई के जवाब में स्वीकार किया है कि इमारत में छह बोरवेल लगे पाए गए हैं। वहीं, दरियागंज के एसडीएम ने आरटीआई के जवाब में कहा है कि तीन बोरवेल मिले हैं, जिन्हें सील कर दिया गया है। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड और संबंधित थाना प्रभारी के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त टीम को 10 दिनों के भीतर इमारत का सर्वेक्षण करने और रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।

काेई अवैध बोरवेल चालू पाया जाए तो संबंधित अफसर पर कार्रवाई करें

खंडपीठ ने कहा, इस तरह की अवैध गतिविधियों के चलते लगातार गिरते जलस्तर को ध्यान में रखते हुए हम निर्देश देते हैं कि उक्त इमारत का सर्वे एमसीडी आयुक्त, दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ और संबंधित थाना प्रभारी द्वारा नामित वरिष्ठ अधिकारियों की टीम द्वारा किया जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि स्थल पर कोई अवैध बोरवेल चालू पाया जाए तो संबंधित अधिकारी आवश्यक कार्रवाई करें। साथ ही, यदि सर्वेक्षण टीम को पता चले कि पहले अवैध बोरवेल कार्यरत थे, तो अपनी रिपोर्ट में उनकी संख्या और कब से वे चालू थे, इसका उल्लेख भी किया जाए।

भवन मालिकों पर पर्यावरणीय हर्जाना लगाने पर विचार करेगी

अदालत ने यह भी कहा कि रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर वह भवन मालिकों पर पर्यावरणीय हर्जाना लगाने पर विचार करेगी, और मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि भवन मालिक उस प्लॉट पर लगभग 100 फ्लैट बना रहा है और बोरवेल क्षेत्र के निवासियों और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस संबंध में कई बार अधिकारियों को आवेदन दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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