Benami property: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध अधिनियम, 1988 के तहत की गई संपत्ति अटैचमेंट को केवल उसी कानून में निर्धारित प्राधिकरण के समक्ष चुनौती दी जा सकती है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अतुल चंद्रकर की पीठ ने एनसीएलएटी, चेन्नई के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं पर 5-5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। इसे दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के तहत एनसीएलटी या एनसीएलएटी में नहीं उठाया जा सकता।
कानून में तय प्रक्रिया से बचने की कोशिश
पीठ ने कहा, ‘यह सही नीयत से नहीं किया गया, बल्कि कानून में तय प्रक्रिया से बचने की कोशिश है।’ कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बेनामी कानून के तहत उपलब्ध वैधानिक उपायों को दरकिनार कर दूसरे मंच का सहारा लेना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि स्पष्ट कानूनी स्थिति के बावजूद एनसीएलटी, एनसीएलएटी और शीर्ष अदालत का समय लिया गया। जुर्माने की राशि चार सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन में जमा करने का निर्देश दिया गया है।

