High court of Jharkhand
Illegally detained: झारखंड के चतरा जिले में 10 वीं कक्षा के छात्र को कथित तौर पर 10 दिनों तक अवैध हिरासत में रखने पर हाईकोर्ट ने पुलिस अफसरों को तगड़ा झटका दिया है।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई
मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए और उन्हें घंटों तक कोर्ट रूम में बैठने का आदेश दिया। यह कार्रवाई छात्र की मां द्वारा दायर ‘हेबियस कॉर्पस’ (Habeas Corpus – बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई।
मामले की पृष्ठभूमि
- आरोप: याचिकाकर्ता के अनुसार, उनके बेटे को 26 जनवरी की रात को पुलिस ने उठाया था और बिना किसी कानूनी आधार के 10 दिनों तक हिरासत में रखा।
- बेंच: मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस ए.के. राय की खंडपीठ कर रही है।
- अधिकारियों पर कार्रवाई: कोर्ट ने चतरा के DSP, टंडवा थाना प्रभारी और लावालांग थाना प्रभारी से तीखे सवाल पूछे। जब अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए कि छात्र की हिरासत केस डायरी में दर्ज है या नहीं, तो कोर्ट ने उनके फोन जब्त कर लिए।
कोर्ट की मुख्य आपत्तियां
- बिना रिकॉर्ड हिरासत: कोर्ट ने पूछा कि यदि छात्र को केवल पूछताछ के लिए ले जाया गया था, तो उसे तुरंत क्यों नहीं छोड़ा गया? 10 दिनों तक बिना किसी औपचारिक रिकॉर्ड के उसे हिरासत में रखने का आधार क्या था?
- पुलिस की कार्यप्रणाली: सुनवाई में सामने आया कि छात्र को पहले लावालांग पुलिस ने उठाया और बाद में टंडवा पुलिस को सौंप दिया।
- SP की पेशी: कोर्ट के आदेश पर चतरा के पुलिस अधीक्षक (SP) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए और केस डायरी के अंश पढ़कर सुनाए।
अगली कार्रवाई और सुनवाई
- फोन वापसी: सुनवाई खत्म होने के बाद अधिकारियों को उनके मोबाइल फोन लौटा दिए गए।
- अगली तारीख: कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी तय की है।
- व्यक्तिगत पेशी: तीनों पुलिस अधिकारियों को उस दिन फिर से व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर रहने का आदेश दिया गया है।





