Karnataka High Court
Jan Aushadhi medicines: कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जनऔषधि केंद्रों को बंद करने के फैसले को खारिज कर दिया है।
राज्य सरकार के मई में जारी आदेश को रद्द कर दिया
जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने 10 दिसंबर को इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार के मई में जारी आदेश को रद्द कर दिया। सरकार ने कहा था कि जनऔषधि केंद्रों के चलते मुफ्त दवा वितरण में भ्रम हो रहा है। लेकिन कोर्ट ने इसे अपर्याप्त कारण बताया और कहा कि यह फैसला उन लोगों की वैध उम्मीदों के खिलाफ है, जो पिछले 7 सालों से इन केंद्रों को चला रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि जनऔषधि केंद्रों का संचालन जनहित में है और सरकार इन्हें बंद कर जनहित के खिलाफ काम कर रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार अपने पहले किए गए समझौते से पीछे नहीं हट सकती।
जनऔषधि केंद्रों के संचालकों ने दी थी चुनौती
हाईकोर्ट ने कहा कि जनहित में राजनीति होनी चाहिए, न कि राजनीति में जनहित। कोर्ट ने कांग्रेस सरकार की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि राज्य की अपनी मुफ्त दवा योजना है, इसलिए जनऔषधि केंद्रों की जरूरत नहीं है। जनऔषधि केंद्रों के संचालकों ने सरकार के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी।
प्रशासनिक भ्रम को मनमानी का बहाना नहीं बना सकते
कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक भ्रम को मनमानी का बहाना नहीं बनाया जा सकता। जनऔषधि केंद्रों को बिना किसी शिकायत के लगातार चलाया जा रहा है। ऐसे में इन्हें अचानक बंद करना गलत है।
राज्य की कार्यकुशलता पर सवाल
कोर्ट ने राज्य सरकार की मुफ्त दवा योजना की कार्यकुशलता पर भी सवाल उठाए। कहा- अगर अस्पतालों में दवाएं मुफ्त और पर्याप्त मात्रा में मिल रही होतीं, तो मरीज जनऔषधि केंद्रों से दवाएं क्यों खरीदते?







