
LEGAL AID: न्याय की पहुंच सभी के लिए समान बनाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है।
आरोपी की प्रतिक्रिया को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज करेगा
अदालत ने कहा है कि यदि कोई आरोपी अपना वकील करने में असमर्थ है, तो ट्रायल शुरू होने से पहले कोर्ट उसे मुफ्त कानूनी सहायता (Legal Aid) का प्रस्ताव देगा और इस पर आरोपी की प्रतिक्रिया को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने लंबी कैद और समान मामले में दूसरे आरोपी को जमानत मिलने के आधार पर चेल्लामणि को जमानत दे दी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
- जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने यह निर्देश रेजिनामैरी चेल्लामणि से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया।
- मामला: आरोपी महिला NDPS एक्ट (ड्रग्स मामला) के तहत पिछले 4 साल, 1 महीने और 28 दिनों से जेल में थी।
- समस्या: ट्रायल के शुरुआती दौर में उसके पास वकील नहीं था, जिससे वह गवाहों से जिरह (Cross-examine) नहीं कर पाई। बाद में जब उसने अपना वकील किया, तब जाकर उसे दोबारा जिरह की अनुमति मिली। इस प्रक्रिया में उसे लंबी जेल काटनी पड़ी।
ट्रायल कोर्ट्स के लिए नई गाइडलाइंस
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब हर आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट को ये कदम उठाने होंगे।
- अधिकार की जानकारी: कोर्ट आरोपी को बताएगा कि उसे कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार है।
- कानूनी सहायता का ऑफर: यदि आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर है, तो उसे सरकारी खर्चे पर ‘लीगल एड’ वकील देने का प्रस्ताव दिया जाएगा।
- रिकॉर्ड दर्ज करना: गवाहों की जांच शुरू होने से पहले, कोर्ट को अपने आदेश में लिखना होगा कि उसने आरोपी को क्या प्रस्ताव दिया, उस पर आरोपी का क्या जवाब था और उस पर क्या कार्रवाई की गई।
- सख्ती से पालन: बेंच ने कहा कि इस प्रक्रिया को “पूरी तत्परता और ईमानदारी” (Scrupulously) से लागू करना अनिवार्य है।
सभी हाई कोर्ट्स को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश की प्रति सभी हाई कोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीशों को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि वे अपने राज्य की सभी जिला और निचली अदालतों को इसके पालन के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकें।






