LIC Policy Data: दिल्ली हाई कोर्ट ने एलआईसी (LIC) के खिलाफ दायर एक अपील को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया है कि बिना बुनियादी व्यक्तिगत जानकारी (Basic Information) के बीमा पॉलिसी का विवरण मांगना व्यावहारिक रूप से असंभव और असुरक्षित है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने एक महिला की अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने बिना पॉलिसी नंबर दिए अपने नाम पर मौजूद सभी एलआईसी पॉलिसियों का विवरण मांगा था। अदालत ने माना कि करोड़ों पॉलिसियों के डेटाबेस में से किसी एक रिकॉर्ड को ढूंढने के लिए न्यूनतम जानकारी देना अनिवार्य है।
करोड़ों का डेटाबेस और व्यावहारिक सीमाएं
- विशाल डेटा: एलआईसी के पास करोड़ों पॉलिसियों का डेटाबेस है। बिना किसी खास पहचानकर्ता (Identifier) के केवल सामान्य अनुरोध पर किसी की फाइल ढूंढना एलआईसी के लिए “प्रैक्टिकली इम्पॉसिबल” है।
- पॉलिसी नंबर अनिवार्य नहीं, पर जानकारी जरूरी: कोर्ट ने साफ किया कि अगर आपके पास पॉलिसी नंबर नहीं है, तब भी आप जानकारी ले सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको नाम, जन्म तिथि (DOB), पता या अन्य पहचान विवरण देने होंगे।
सुरक्षा और संवेदनशीलता (Data Privacy)
- अदालत ने बीमा जानकारी की सुरक्षा पर जोर दिया।
- संवेदनशील डेटा: इंश्योरेंस से जुड़ी जानकारी निजी और संवेदनशील होती है। बिना उचित पहचान के इसे किसी को भी सौंपना जोखिम भरा हो सकता है।
- दुरुपयोग का खतरा: यदि बिना पुख्ता पहचान के जानकारी दी गई, तो इसका गलत इस्तेमाल होने की संभावना बढ़ जाती है।
RTI और हाई कोर्ट की शक्तियां
- इस मामले में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने पहले एलआईसी को ऐसी व्यवस्था बनाने की सलाह दी थी जिससे बिना पॉलिसी नंबर के डेटा मिल सके।
- सलाह बनाम आदेश: सिंगल जज ने CIC के निर्देशों को केवल “एडवाइजरी” माना था, जिसे डिवीजन बेंच ने सही ठहराया।
- अनुच्छेद 226: कोर्ट ने याचिकाकर्ता के उस तर्क को खारिज कर दिया कि CIC का आदेश अंतिम है। बेंच ने कहा कि Article 226 के तहत हाई कोर्ट की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति सर्वोपरि है।
फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| विषय | अदालत का निष्कर्ष |
| मुख्य निर्देश | पॉलिसी खोजने के लिए आवेदक को न्यूनतम व्यक्तिगत विवरण देना ही होगा। |
| एलआईसी की प्रणाली | एलआईसी के पास पहले से ही नाम और पते से डेटा खोजने का सिस्टम है। |
| अपील का परिणाम | अपील को “भ्रामक” (Misconceived) बताते हुए खारिज कर दिया गया। |
| कानूनी संदेश | अधिकारों के साथ-साथ जिम्मेदारी और सही प्रक्रिया का पालन जरूरी है। |
निष्कर्ष: सुव्यवस्थित प्रक्रिया की आवश्यकता
दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला संतुलित है। एक ओर यह पॉलिसीधारकों के सूचना के अधिकार की रक्षा करता है, वहीं दूसरी ओर एलआईसी जैसे विशाल संस्थानों की व्यावहारिक सीमाओं और डेटा सुरक्षा को भी महत्व देता है। यह साफ है कि आप जानकारी मांग सकते हैं, लेकिन आपको विभाग की मदद के लिए सही इनपुट (नाम, पता, आदि) देने होंगे।

