National holiday: सुप्रीम कोर्ट ने सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती (प्रकाश पर्व) को पूरे देश में राजपत्रित या सार्वजनिक अवकाश (Gazetted/Public Holiday) घोषित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने ‘ऑल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सख्त रुख अपनाया।
अदालत की मुख्य टिप्पणी: “छुट्टियां पहले ही बहुत हैं”
सुनवाई के दौरान जस्टिस मेहता ने देश में छुट्टियों की वर्तमान स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा
“भारत में पहले से ही बहुत सारी धार्मिक छुट्टियां हैं। आइए अब छुट्टियों की संख्या में और इजाफा न करें।”
अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वे इस मामले में दखल देने के इच्छुक नहीं हैं और इस पर विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा।
याचिकाकर्ता की दलील: “नीति का अभाव”
- याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने निम्नलिखित तर्क रखे
- निश्चितता की कमी: भारत में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं है। सरकारें राजनीतिक लाभ और तुष्टीकरण के आधार पर अपनी “मर्जी और सनक” से छुट्टियां घोषित करती हैं।
- दिशानिर्देशों की मांग: याचिका में केंद्र सरकार को ‘सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश’ जारी करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
- व्यापक कवरेज: मांग की गई थी कि प्रकाश पर्व को उन राज्यों में तो अनिवार्य रूप से छुट्टी घोषित किया जाए जहाँ सिखों की जनसंख्या अधिक है या जो गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन और गतिविधियों से जुड़े हैं।
राजनीतिक तुष्टीकरण का आरोप
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि किसी मार्गदर्शक सिद्धांत के अभाव में, सत्ता में बैठी राजनीतिक पार्टियां किसी विशेष वर्ग को खुश करने के लिए छुट्टियों का उपयोग करती हैं। हालांकि, अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट कर दिया कि न्यायपालिका छुट्टियों की सूची में और विस्तार करने के पक्ष में नहीं है।
क्या है वर्तमान स्थिति?
वर्तमान में गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व कई राज्यों (जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली) में सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है, लेकिन यह केंद्र सरकार की अनिवार्य ‘राजपत्रित छुट्टियों’ (Gazetted Holidays) की सूची में शामिल नहीं है।

