Official Secrets Act Ruling: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (OSA), 1923 की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस उर्मिला जोशी फालके की बेंच ने महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (Maha-Metro) के एक कर्मचारी के खिलाफ दर्ज FIR के एक हिस्से को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ‘जासूसी’ शब्द का अर्थ बहुत व्यापक है और इसे मामूली ऑफिस विवादों या अनुशासनहीनता पर लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ऑफिस की अंदरूनी कॉल रिकॉर्ड करना या उन्हें शेयर करना ‘जासूसी’ (Spying) नहीं माना जा सकता, जब तक कि इससे देश की संप्रभुता या सुरक्षा को कोई खतरा न हो।
फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | हाई कोर्ट का निष्कर्ष |
| मुख्य सवाल | क्या ऑफिस कॉल रिकॉर्ड करना जासूसी है? |
| अदालत का फैसला | नहीं, यदि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई तत्व शामिल नहीं है। |
| रद्द की गई धारा | ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (OSA) की धारा 3(1)(c)। |
| बरकरार धाराएं | सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की धारा 66 और 66(B)। |
| नतीजा | याचिका आंशिक रूप से मंजूर (Partly Allowed); ट्रायल जारी रहेगा। |
मामला क्या था? (The Background)
- आरोप: याचिकाकर्ता महा-मेट्रो में कार्यरत था और इंटरकॉम के जरिए अधिकारियों की कॉन्फ्रेंस कॉल कनेक्ट करने का काम करता था। आरोप था कि उसने वरिष्ठ अधिकारियों की बातों को अपने मोबाइल पर रिकॉर्ड किया और किसी तीसरे व्यक्ति को भेज दिया।
- पुलिस की कार्रवाई: पुलिस ने इसे देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला मानते हुए ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा 3 और IT एक्ट की धारा 66(B) के तहत केस दर्ज किया था।
जासूसी (Spying) की कानूनी परिभाषा
- धारा 3 का दायरा: इस धारा के तहत सजा तभी दी जा सकती है जब किया गया कार्य “राज्य की सुरक्षा या हितों के प्रतिकूल” हो या भारत की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करता हो।
- प्रतिबंधित स्थान (Prohibited Place): ‘जासूसी’ का आरोप तब लगता है जब कोई व्यक्ति किसी प्रतिबंधित स्थान (जैसे सैन्य ठिकाने) की जानकारी लीक करे। मेट्रो रेल का ऑफिस ‘प्रतिबंधित स्थान’ की श्रेणी में नहीं आता।
- कोर्ट की टिप्पणी: “ऑफिस कॉल की रिकॉर्डिंग को किसी भी तरह से जासूसी का अपराध नहीं कहा जा सकता। कानून की इस धारा का उपयोग गलतफहमी (Misconception) के आधार पर किया गया है।”
IT एक्ट के तहत कार्यवाही जारी रहेगी
- भले ही कोर्ट ने ‘जासूसी’ के गंभीर आरोपों को हटा दिया, लेकिन कर्मचारी को पूरी तरह राहत नहीं मिली।
- अनधिकृत संचार: कोर्ट ने माना कि बिना अनुमति के कॉल रिकॉर्ड करना और उसे साझा करना IT एक्ट की धारा 43, 66 और 66(B) के तहत अपराध हो सकता है।
- अनुशासनात्मक उल्लंघन: यह आचरण केवल ‘मिस्कंडक्ट’ नहीं है, बल्कि बेईमानी की नीयत से किया गया डेटा का दुरुपयोग है। इसलिए, इन धाराओं के तहत मुकदमा चलता रहेगा।
कानून का सही प्रयोग
बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला यह सुनिश्चित करता है कि ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट जैसे कठोर औपनिवेशिक कानूनों का इस्तेमाल छोटे-मोटे कॉरपोरेट या प्रशासनिक विवादों को निपटाने के लिए न किया जाए। कोर्ट ने साफ कर दिया कि ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ और ‘ऑफिस अनुशासन’ दो अलग-अलग चीजें हैं।

