pigeons flying
Pigeon Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को साफ किया कि उसने मुंबई में कबूतरखानों को बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया है।
विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाकर जांच की जाए
कोर्ट ने सिर्फ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के बंद करने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया था। कोर्ट ने कहा कि इंसानी जीवन सबसे अहम है और अगर कबूतरों से बुजुर्गों और बच्चों की सेहत पर असर पड़ता है, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि सरकार चाहे तो विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाकर यह जांच करा सकती है कि पुराने कबूतरखानों को चालू रखना चाहिए या नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला आम लोगों की सेहत से जुड़ा है और इसमें संतुलन जरूरी है।
कबूतरों से होने वाला नुकसान स्थायी है
कोर्ट ने कहा कि सभी मेडिकल रिपोर्ट्स यह दिखाती हैं कि कबूतरों से होने वाला नुकसान स्थायी है। इसलिए सरकार को इस पर वैज्ञानिक अध्ययन कराना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि वह खुद विशेषज्ञ नहीं है, इसलिए इस पर फैसला लेने से पहले विशेषज्ञों की राय जरूरी है। कुछ लोग कबूतरों को दाना डालना चाहते हैं, लेकिन सरकार को सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का ध्यान रखना होगा, न कि सिर्फ कुछ लोगों के।
विशेषज्ञ कमेटी की सिफारिशों के आधार पर फैसला होगा
- कोर्ट ने कहा कि अगर विशेषज्ञों की कमेटी यह माने कि BMC का फैसला सही है, तो पक्षियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है।
- कोर्ट ने महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल को 13 अगस्त की अगली सुनवाई में मौजूद रहने को कहा है, ताकि विशेषज्ञ कमेटी बनाने का आदेश दिया जा सके।
- कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार और BMC को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहें।
पिछले हफ्ते कबूतरखानों को ढकने के बाद हुआ था विरोध
- इस हफ्ते की शुरुआत में मुंबई के कई कबूतरखानों को ढक दिया गया था, जिससे विरोध शुरू हो गया था।
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तब कहा था कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद कबूतरखानों को बंद किया गया है।
- लेकिन कोर्ट ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि उसने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था, सिर्फ अंतरिम राहत नहीं दी थी।
याचिकाकर्ताओं ने BMC के फैसले को दी थी चुनौती
- कोर्ट में यह मामला उन लोगों की याचिकाओं पर चल रहा है, जो कबूतरों को दाना डालते हैं और BMC के बंद करने के फैसले का विरोध कर रहे हैं।
- कोर्ट ने पिछले महीने याचिकाकर्ताओं को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन यह भी कहा था कि किसी भी हेरिटेज कबूतरखाने को तोड़ा न जाए।





