Police Arrest Rule: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, किसी भी अपराध में गिरफ्तारी के समय आरोपी को उसकी गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में और उसकी समझ की भाषा में बताना अनिवार्य होगा।
संविधान के अनुच्छेद 22(1) का दिया हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस एजे मसीह की बेंच ने यह फैसला मुंबई बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन केस के आरोपी मिहिर राजेश शाह की याचिका पर सुनाया। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मूलभूत सुरक्षा है।
मजिस्ट्रेट के सामने पेशी से कम से कम दो घंटे पहले दें जानकारी
फैसले में कहा गया कि यदि गिरफ्तारी के समय लिखित जानकारी देना संभव न हो, तो उसे मौखिक रूप से बताया जाए, लेकिन लिखित जानकारी किसी भी हाल में मजिस्ट्रेट के सामने पेशी से कम से कम दो घंटे पहले देनी होगी। ऐसा नहीं हुआ तो गिरफ्तारी और रिमांड की प्रक्रिया अवैध मानी जाएगी और आरोपी को रिहा किया जा सकता है। फैसले में कहा गया कि यह नियम भारतीय दंड संहिता (अब भारतीय न्याय संहिता, 2023) सहित सभी कानूनों और अपराधों पर लागू होगा।

