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Process of law: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महिला को उसके पैतृक घर का कब्जा तुरंत वापस दिलाने का आदेश दिया है।
जज ने इस मामले में ‘अनुचित जल्दबाजी’ और ‘अनियमितताएं’ बरतीं
कोर्ट ने पुलिस और राजस्व अधिकारियों द्वारा महिला को जबरन घर से बेदखल करने की कार्रवाई को ‘कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग’ करार दिया है। जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस अरुण कुमार की बेंच ने इस मामले में सिद्धार्थनगर के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच शुरू करने के लिए मामला चीफ जस्टिस को भेज दिया है। कोर्ट ने पाया कि जज ने इस मामले में ‘अनुचित जल्दबाजी’ और ‘अनियमितताएं’ बरतीं।
यह है पूरा मामला
यह मामला सिद्धार्थनगर की रहने वाली सोनी और उनके तीन मासूम बच्चों से जुड़ा है। सोनी अपने पति और देवर के साथ पुश्तैनी मकान में रहती थी, जहाँ वह अपनी जीविका के लिए एक ब्यूटी पार्लर भी चलाती थी। आरोप है कि सीजेएम कोर्ट के एक पेशकार (प्रतिवादी संख्या 8) ने सोनी के पति और देवर से धोखे से मकान की सेल डीड अपने नाम करवा ली। जब पेशकार सीधे तौर पर कब्जा नहीं कर पाया, तो उसने कोर्ट के जरिए आदेश लिया। 18 जुलाई को भारी पुलिस बल और राजस्व टीम ने सोनी को गिरफ्तार कर लिया और उसके 8, 4 और 3 साल के बच्चों को पुलिस वैन में बैठाकर घर से बाहर निकाल दिया।
कोर्ट की कड़ी फटकार
- पेशकार पर जुर्माना: हाईकोर्ट ने अवैध कब्जे और महिला को मानसिक प्रताड़ना देने के लिए आरोपी पेशकार पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
- प्रशासनिक अधिकारियों पर सवाल: कोर्ट ने कहा कि जिस ‘आक्रामक जल्दबाजी’ में प्रशासन ने कब्जा दिलाया, वह उनकी नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ट्रायल कोर्ट और प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया है।
यह भी की टिप्पणी
‘बच्चों को वैन में बंद करना शर्मनाक’ बेंच ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि पुलिस ने छोटे बच्चों को हिरासत में लिया और एक महिला को उसके आजीविका के साधन (पार्लर) से बेदखल कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह से बिना किसी कानूनी अधिकार (बिना जुरिसडिक्शन) के की गई थी।







